Jharkhand के चतरा में हुए दुखद एयर एंबुलेंस हादसे की जांच रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Jharkhand: झारखंड के चतरा में हुए दर्दनाक एयर एंबुलेंस हादसे को लेकर एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। इस हादसे में मरीज और उनके परिजनों सहित कुल 7 लोगों की मौत हुई थी। रिपोर्ट में ऐसे कई तकनीकी पहलुओं का खुलासा हुआ है, जिन्होंने विमान की सुरक्षा और निगरानी पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
ब्लैक बॉक्स के बिना उड़ान भर रहा था विमान
जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि हादसे का शिकार हुआ रेडबर्ड का बीचक्राफ्ट C-90 (Beechcraft C-90) विमान ब्लैक बॉक्स से लैस नहीं था। विमान में न तो कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) था और न ही फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR)। मौजूदा विमानन नियमों के तहत इस श्रेणी के विमानों को इन उपकरणों से छूट मिली हुई थी।
ब्लैक बॉक्स न होने के कारण जांच एजेंसियों के लिए पायलटों की आखिरी बातचीत और तकनीकी खराबी के सटीक पलों को समझना मुश्किल हो गया है।
इमरजेंसी लोकेटर (ELT) ने नहीं दिया साथ
हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी का एक मुख्य कारण विमान का इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) रहा। रिपोर्ट के अनुसार, क्रैश के समय ELT सक्रिय (Activate) नहीं हुआ। इस वजह से तकनीकी रूप से विमान की लोकेशन नहीं मिल पाई और प्रशासन को स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर निर्भर रहना पड़ा।
रडार से गायब होने के आखिरी 23 मिनट
विमान ने 23 फरवरी को रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी। उड़ान के ठीक 23 मिनट बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से इसका संपर्क टूट गया। क्रू ने कोलकाता ATC से फ्लाइट लेवल 140 (करीब 14,000 फीट) पर जाने की अनुमति मांगी थी। अनुमति मिलने के बाद विमान की ओर से कोई जवाब नहीं आया और वह रडार से ओझल हो गया।
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि विमान का अंतिम निरीक्षण 20 जनवरी 2026 को ही किया गया था। यानी हादसे से महज एक महीने पहले विमान को ‘फिट’ घोषित किया गया था। ऐसे में एक महीने के भीतर ऐसी क्या बड़ी तकनीकी खराबी आई, यह अब भी रहस्य बना हुआ है।
झारखंड एयर एंबुलेंस हादसा
| विवरण | जानकारी |
| विमान का मॉडल | बीचक्राफ्ट C-90 (रेडबर्ड) |
| कुल मौतें | 07 (मरीज और अटेंडेंट सहित) |
| हादसे की जगह | चतरा, झारखंड |
| गायब उपकरण | CVR और FDR (ब्लैक बॉक्स) |
| जांच एजेंसी | AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) |
हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई खामियों को उजागर किया है, लेकिन हादसे की “सटीक वजह” अभी भी स्पष्ट नहीं है। CVR और FDR न होने की वजह से अब जांच पूरी तरह से विमान के मलबे और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर टिकी है।












