Assam विधानसभा चुनाव के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेताओं के कार्यक्रमों में रुकावटें लगातार चर्चा में हैं। पहले Kalpana Soren की रैली रोकी गई थी, और अब झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने भी अपने कार्यक्रमों में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
कल कल्पना सोरेन को सभा करने से रोका गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए उन्हें सभा स्थल पर जाने से रोका। इसके चलते कल्पना ने सड़क किनारे खड़ी होकर मोबाइल फोन के माध्यम से समर्थकों और जनता को संबोधित किया।
आज Hemant Soren ने खुमताई, नहरकटिया और मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्रों में अपने कार्यक्रमों के दौरान भी समान समस्या का सामना किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हेलीपैड की स्वीकृति नहीं दी और प्रोटोकॉल के नाम पर उन्हें निर्धारित स्थानों तक जाने से रोक दिया। इसके बावजूद उन्होंने सड़क मार्ग से मार्गेरीटा जाते हुए फोन के जरिए खुमताई और नहरकटिया की जनता को संबोधित किया।
असम के चाबुआ विधानसभा के मेरे भाइयों-बहनों से मिलने से भी मुझे रोका गया, लेकिन विरोधियों का ऐसा षड्यंत्र कभी कामयाब नहीं होगा।
सत्ता के घमंड में चूर होकर लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, ताकि सच्चाई जनता तक न पहुंचे। प्रचार रोकना, रास्ता रोकना, यही इनकी… pic.twitter.com/c1NVw2MkWL
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) April 6, 2026
Hemant Soren ने इस अवसर पर कहा, “आप रास्ता रोक सकते हैं, लेकिन जनआक्रोश नहीं रोक सकते। हेलीकॉप्टर रोक सकते हैं, लेकिन जनता के इरादे नहीं रोक सकते। मंच छीन सकते हैं, लेकिन आंदोलन की आवाज़ नहीं दबा सकते।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि असम की जनता जाग चुकी है और हर रुकावट का जवाब देगी। चाय बागानों के श्रमिक, आदिवासी, अल्पसंख्यक, नौजवान और महिलाएं मिलकर इस अन्याय का जवाब 9 अप्रैल को वोट के माध्यम से देंगी।
सोरेन ने यह भी कहा कि यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं है, बल्कि “सम्मान, पहचान, अधिकार और हिस्सेदारी” की लड़ाई है। तीर-धनुष चुनाव चिन्ह पर भारी मतदान कर जनता अपनी ताकत दिखाएगी।
इस तरह प्रोटोकॉल के नाम पर रैलियों में प्रवेश रोकने के आरोपों ने असम चुनावी सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है।










