रांची में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अभिभावकों के लिए राहतभरा बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त **मंजूनाथ भजन्त्री** की अध्यक्षता में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें निजी स्कूलों की फीस और अन्य खर्चों को लेकर अहम निर्णय लिए गए।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों पर पड़ने वाले अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करना और शिक्षा को अधिक न्यायसंगत बनाना है।
10% तक ही फीस बढ़ाने की अनुमति
नए नियमों के तहत:
* निजी स्कूल अधिकतम **10% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं**
* 10% से ज्यादा वृद्धि के लिए जिला समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा
* बढ़ी हुई फीस कम से कम **दो साल तक लागू रहेगी**
* स्कूलों को पिछले **3 साल की कक्षावार फीस का पूरा रिकॉर्ड** देना होगा
फीस और PTA की जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी
अब हर निजी स्कूल को:
* अपनी **फीस समिति और PTA (अभिभावक-शिक्षक संघ)** बनानी होगी
* इसकी जानकारी **वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करनी होगी**
इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
किताबों को लेकर सख्त नियम
* स्कूल केवल **NCERT** की किताबों के अलावा अन्य किताबें अनिवार्य नहीं कर सकते
* किताबों में बदलाव **5 साल में एक बार ही संभव**
* पुरानी किताबों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकेगा
यूनिफॉर्म और ट्रांसपोर्ट पर भी नियंत्रण
**यूनिफॉर्म:**
* 5 साल से पहले बदलाव नहीं
* किसी एक दुकान से खरीदने की बाध्यता खत्म
* अभिभावक बाजार से खरीद सकते हैं
**ट्रांसपोर्ट:**
* शुल्क वृद्धि भी सामान्य फीस नियमों के तहत
* बसों में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी
परीक्षा और एडमिशन से जुड़े बड़े फैसले
* किसी भी छात्र को **परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता**
* परीक्षा के समय कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं
* प्रमोशन के लिए दोबारा एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी
RTE के तहत 25% सीटें अनिवार्य
Right to Education Act के तहत:
* कमजोर और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए **25% सीटें भरना अनिवार्य**
शिकायत करने का आसान तरीका
अभिभावक अब अपनी शिकायत:
* समाहरणालय, रांची में लिखित रूप में जमा कर सकते हैं
* या **अबुआ साथी व्हाट्सएप नंबर: 9430328080** पर भेज सकते हैं
नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना
* उल्लंघन करने पर **₹50,000 से ₹2.5 लाख तक जुर्माना**
* गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता पर भी असर पड़ सकता है
यह फैसला झारखण्ड में निजी शिक्षा व्यवस्था को नियंत्रित करने और अभिभावकों को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी और शिक्षा अधिक सुलभ और पारदर्शी बनेगी।











