देश की संसदीय राजनीति से एक अहम खबर सामने आई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा उपसभापति Harivansh Narayan Singh को एक बार फिर राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत की गई है।
रंजन गोगोई की सेवानिवृत्ति के बाद खाली हुई सीट
Harivansh Narayan Singh को उस सीट पर नामित किया गया है, जो पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुई थी। उनका पिछला कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं।
झारखंड और रांची से गहरा जुड़ाव
Harivansh Narayan Singh का झारखंड, खासकर रांची से बेहद गहरा संबंध रहा है। उन्होंने 1989 में रांची से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक के रूप में कार्यभार संभाला और इस अखबार को नई पहचान दिलाई।
उनके नेतृत्व में ‘प्रभात खबर’ ने चारा घोटाले जैसे बड़े मामलों को उजागर किया और क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक मजबूत मॉडल के रूप में उभरा। रांची में रहते हुए उन्होंने झारखंड (तत्कालीन बिहार) के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
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पत्रकारिता से संसद तक का सफर
हरिवंश नारायण सिंह ने अपने करियर की शुरुआत ‘धर्मयुग’ पत्रिका से की, जो टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का हिस्सा थी। इसके बाद वे ‘रविवार’ पत्रिका (आनंद बाजार समूह) से जुड़े और फिर ‘प्रभात खबर’ के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।
चार दशकों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के मीडिया सलाहकार के रूप में भी काम किया। वर्ष 2014 में वे जनता दल (यू) के टिकट पर बिहार से राज्यसभा पहुंचे।
उपसभापति के रूप में निभाई अहम भूमिका
वे 9 अगस्त 2018 को पहली बार राज्यसभा के उपसभापति बने और 14 सितंबर 2020 को दोबारा इस पद के लिए चुने गए। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही को संतुलित और सुचारू तरीके से संचालित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
JDU ने नहीं बनाया उम्मीदवार, बढ़ी थी अटकलें
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में जनता दल (यू) ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था, जिसे राजनीतिक रूप से एक बड़ा संकेत माना गया। इसके बाद उनकी भूमिका को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।
मनोनयन के राजनीतिक मायने
अब राष्ट्रपति द्वारा उनका मनोनयन किए जाने के बाद इस फैसले के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय उनके अनुभव, संसदीय योगदान और मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को दर्शाता है।
फिर से निभाएंगे अहम जिम्मेदारी
इस नियुक्ति के साथ ही हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाते नजर आएंगे। उनके अनुभव से सदन की कार्यवाही को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।













