रांची में उबाल पारा शिक्षकों का आमरण अनशन चौथे दिन भी जारी
झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों पारा शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। राज्यभर के लगभग 45 हजार आकलन पास सहायक अध्यापक अपनी मांगों को लेकर राजभवन के सामने धरने पर बैठे हैं।
यह प्रदर्शन 18 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ और अब यह आमरण अनशन में बदल चुका है। भीषण गर्मी (करीब 42°C) के बीच शिक्षक खुले आसमान के नीचे बैठे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या हैं पारा शिक्षकों की मुख्य मांगें?
पारा शिक्षकों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- आकलन परीक्षा को TET के समकक्ष मान्यता दी जाए
- समान काम का समान वेतन लागू किया जाए
- सरकार द्वारा पूर्व में किए गए वादों को लागू किया जाए
यह मांगें लंबे समय से उठाई जा रही हैं, लेकिन अब आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है।
अनशन पर बैठे शिक्षकों की बिगड़ती हालत
धरना स्थल पर आमरण अनशन कर रहे कई शिक्षकों की तबीयत खराब होने लगी है। मेडिकल टीम ने जांच के बाद उन्हें अस्पताल जाने की सलाह दी, लेकिन शिक्षकों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो गई जब यह सामने आया कि:
- पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है
- शौचालय की सुविधा का अभाव है
- चिकित्सा व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं
इन हालातों में आंदोलनकारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नेताओं के बयान: सरकार पर तीखा हमला
संघ के प्रदेश नेतृत्वकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है:
- ऋषिकांत तिवारी ने कहा कि आकलन परीक्षा को तुरंत TET के बराबर मान्यता दी जाए
- विकास कुमार चौधरी ने समान वेतन लागू करने की मांग दोहराई
- दिलशाद अंसारी ने चेतावनी दी कि अगर जल्द लिखित समझौता नहीं हुआ, तो आंदोलन और उग्र होगा
वहीं, संघ के अन्य नेताओं ने इसे मूलवासी और आदिवासी शिक्षकों के साथ अन्याय बताया।
सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि:
“इतनी बड़ी संख्या में शिक्षक सड़क पर हैं, लेकिन कोई मंत्री या विधायक अब तक हाल जानने नहीं आया।”
इससे शिक्षकों में आक्रोश और बढ़ता जा रहा है।
23-24 अप्रैल को बड़ा ऐलान: मंत्री-विधायक आवास घेराव
संघ ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला लिया है।
23 और 24 अप्रैल 2026 को पूरे झारखंड में:
- सभी मंत्री और विधायकों के आवास का घेराव किया जाएगा
- शिक्षक दो दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर इसमें शामिल होंगे
यह कदम आंदोलन को राज्यव्यापी और ज्यादा प्रभावशाली बना सकता है।
झारखंड में पारा शिक्षकों का यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। यदि सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सरकार शिक्षकों की मांगों को स्वीकार करती है या यह संघर्ष और लंबा चलता है।












