Jharkhand Politics: केन्द्र सरकार में महिला आरक्षण बिल को लेकर झारखंड में भी सियासी उबाल देखने को मिल रहा है। प्रदेश कांग्रेस शांति सोनल ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है। उन्होने कहा कि विधेयक गिरने से बीजेपी के नेताओं को बड़ा आघात पहुंचा है।
उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर अपना परिसीमन (Delimitation) का एजेंडा लागू करना चाहती थी, जिसे विपक्ष की एकजुटता ने विफल कर दिया।
2024 में क्यों नहीं मिला हक?
सोनाल शांति ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब यह विधेयक 2023 में ही विपक्ष की सहमति से पारित हो चुका था, तो इसे 2024 के लोकसभा चुनाव में लागू क्यों नहीं किया गया? उन्होंने कहा, “यदि केंद्र की मंशा साफ होती, तो वर्तमान 543 सीटों में से करीब 180 महिला सांसद सदन में होतीं। लेकिन भाजपा ने जनगणना और परिसीमन की शर्तें जोड़कर इसे 2029 तक टालने की सोची-समझी रणनीति अपनाई।”
उत्तर-दक्षिण के बीच असमानता की साजिश
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा परिसीमन के माध्यम से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक असमानता पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के नाम पर भाजपा ‘चोर रास्ते’ से अपने परिसीमन प्लान को पास कराना चाहती थी। कांग्रेस ने इस सच को देश के सामने उजागर कर दिया है।
भाजपा का ‘नकली चेहरा’ बेनकाब
सोनाल शांति ने भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा का महिला सशक्तिकरण का दावा पूरी तरह खोखला है। आगामी चुनावों में महिलाओं के दूर जाने के डर से भाजपा अब संशोधन का सहारा ले रही है। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर नीयत साफ है, तो 2023 में पारित कानून के आधार पर तत्काल आरक्षण लागू कर चुनाव कराएं।











