आंदोलन ने लिया नया मोड़: अब सीधे मंत्रियों के घर तक पहुंचेगा विरोध
झारखंड में पारा शिक्षकों का आंदोलन अब निर्णायक और आक्रामक चरण में पहुंच चुका है। राजधानी रांची में चल रहे धरना-प्रदर्शन के बीच शिक्षक संगठनों ने बड़ा फैसला लेते हुए 23 और 24 अप्रैल को राज्यभर में मंत्री और विधायक आवास घेराव (Gherao) का ऐलान कर दिया है।
यह कदम सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है घेराव योजना?
पारा शिक्षक संघ के अनुसार:
- 23-24 अप्रैल 2026 को राज्यव्यापी घेराव
- सभी मंत्री और विधायकों के आवास को किया जाएगा टारगेट
- हजारों शिक्षक दो दिन का आकस्मिक अवकाश लेकर इसमें भाग लेंगे
इससे साफ है कि आंदोलन अब केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे सत्ता के दरवाजे तक पहुंचेगा।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
शिक्षकों का कहना है कि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। मुख्य मांगें हैं:
- आकलन परीक्षा को TET के समकक्ष मान्यता
- समान काम का समान वेतन लागू करना
लंबे समय से चल रहे विरोध और आमरण अनशन के बावजूद सरकार की चुप्पी के कारण यह कदम उठाया गया।
नेताओं की चेतावनी अब होगा उग्र आंदोलन
संघ के नेताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि:
“अगर सरकार जल्द लिखित समझौता नहीं करती, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।”
नेतृत्वकर्ताओं के अनुसार, घेराव के बाद भी मांगें पूरी नहीं हुईं तो राज्यव्यापी हड़ताल और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जा सकता है।
राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- मंत्री-विधायक आवास घेराव से राजनीतिक दबाव काफी बढ़ेगा
- सरकार को जल्द निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है
- यह आंदोलन राज्यव्यापी जनसमर्थन भी हासिल कर सकता है
झारखंड में पारा शिक्षकों का आंदोलन अब सिर्फ मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार के खिलाफ सीधा संघर्ष बन चुका है।
23-24 अप्रैल का घेराव इस आंदोलन का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। अब सभी की नजर इस पर है कि सरकार क्या कदम उठाती है।

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