Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल को पत्र लिखकर जनगणना 2027 में आदिवासी/सरना धर्म को अलग पहचान देने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा लिखे गए, इस पत्र में उन्होंने झारखंडवासियों की सामूहिक भावना, वर्ष 2023 में किए गए पूर्व अनुरोध, झारखंड विधानसभा के संकल्प और राज्य की आकांक्षाओं का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से विशेष हस्तक्षेप की अपील की है।
CM Hemant Soren : लंबे समय से अदिवासी समाज कर रहा है मांग
ध्यान रहे कि मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की विशिष्ट धार्मिक परंपराएं, जैसे सरना धर्म, लंबे समय से अलग पहचान की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक जनगणना में इसे स्वतंत्र कोड नहीं दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2021 में प्रस्तावित जनगणना विभिन्न कारणों से टल गई थी और अब 2027 में इसे पूरा करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। ऐसे में यह एक महत्वपूर्ण अवसर है कि जनगणना के दूसरे चरण में धर्म से जुड़े कॉलम में आदिवासी/सरना धर्म (तथा अन्य समान धार्मिक व्यवस्थाओं) के लिए अलग कोड निर्धारित किया जाए।
उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया कि जनगणना प्रपत्र में आवश्यक संशोधन कर आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान को संरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए, ताकि उनकी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत को उचित मान्यता मिल सके। आपकों बता दें कि झारखंड में आदिवासी संगठन लंबे समय से सरना धर्म कोड की मांग कर रहा था। कई बार समज के लोगों ने जनतर मनतर पहुंच कर इस मुद्दें को उठाया था। अब सीएम हेमंत सोरेन ने इस मामले में केंद्र को पत्र लिखा है, जिससे आदिवासी समाज में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
1 मई से 15 मई तक चलेगी प्रक्रिया
आपकों बता दें कि झारखंड में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई 2026 से शुरू हो गया है, जो 15 मई तक चलेगी। इस चरण में नागरिक se.census.gov.in पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन “स्व-गणना” (self-enumeration) कर सकते हैं,। इसके बाद 16 मई से 14 जून 2026 तक मकान सूचीकरण का कार्य होगा







