विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2026: देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के शुरुआती रुझानों ने झारखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। झारखंड अब भगवा महासागर के बीच एक टापू जैसा नजर आ रहा है। महासागर के बीच झारखंड चारों तरफ से भगवा रंग से घिरा ऐसा नजर आ रहा है मानो वह बस अकेला बचा हुआ है।
ऐसा इसलिए क्योंकि पांच राज्यों में होने वाले चुनाव के बीच जो नतीजे सामने आ रहे है, उसमें असम में हिमंता ने सबको पछाड़ा है। तो बंगाल के नतीजे फिलहाल हैरान कर रहे है। क्योंकि बंगाल में बीजेपी लगातार बढ़त बनाए हुए है। अगर ऐसा हुआ तो बंगाल में बीजेपी पहली बार अपनी सरकार बना सकती है।
विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2026: बंगाल में पहली बार सरकार बनाने के करीब बीजेपी
देखा जाए तो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भले ही एक राज्य की सत्ता तय करें, लेकिन इसके राजनीतिक असर की गूंज झारखंड तक सुनाई देगी। इस मुकाबले के केंद्र में जहां ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस है, वहीं दूसरी ओर भाजपा पूरे दमखम के साथ सत्ता पर काबिज होने की कोशिश में है। ऐसे में यह सवाल अहम हो गया है कि आखिर इन नतीजों से झारखंड की सत्ता में काबिज सरकार और विपक्षी खेमों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी एक बार फिर जीत दर्ज करती हैं, तो इसे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के खिलाफ बड़ी जीत के तौर पर देखा जाएगा। इसका सीधा असर झारखंड में महागठबंधन की राजनीति पर पड़ सकता है। इसमें हेमंत सोरेन और उनके सहयोगी पार्टी के नेता भाजपा विरोधी एकता को और मजबूती देंगे।
झारखंड में दिखाई देगा बंगाल का प्रभाव
दूसरी ओर, यदि पश्चिम बंगाल में बीजेपी सत्ता में आती है, तो इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं। इसका प्रभाव झारखंड में भी दिखाई देगा, याद हो कि 2024 के चुनाव में मिली हार के बाद से भाजपा झारखंड में कमजोर नजर आ रही थी। इस जीत का परिणाम यह होगा कि पार्टी अपने संगठन को और अधिक मजबूत बनाएगी। ऐसी स्थिति में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राजनीति पर दबाव बढ़ सकता है। हेमंत सोरेन के सामने भाजपा के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2026: झारखंड एकमात्र राज्य जहां गैर-बीजेपी की सरकार
अगर मानचित्र पर गौर करे तो उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, ओडिशा और असम में बीजेपी की सरकार है, और इन तमाम राज्यों के बीच झारखंड एक मात्र ऐसा राज्य में जहां गैर भाजपा की सरकार है। ऐसे में जिस तरह से बीजेपी बांग्लादेशी मुस्लिम, डेमोग्राफी चेंज जैसे मुद्दे भाजपा के प्रमुख मुद्दे थे, इस पर भाजपा पूरी जोर से उठा सकती है।
इसके साथ ही, बाबूलाल मरांडी, चंपई सोरेन, अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, मधु कोड़ा यहां के स्थानीय वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश करेंगे। वही ट्रेज़री घोटाला जो फिलहाल राज्य के लिए सबसे हॉट प्वाइंट है। इन तमाम मामलों में बीजेपी हेमंत सरकार को घेर सकती है।
बंगाल के नतीजे क्षेत्रीय दलों की भूमिका तय करेंगे
वही अगर राजनीतिक जानकारों की बात माने तो बंगाल के नतीजे यह भी तय करेंगे कि देश की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका कितनी प्रभावी रहेगी। क्योंकि कांग्रेस के बाद एक अकेले ममता बनर्जी ही है, जो प्रमुखता के साथ बीजेपी का विरोध दिल्ली तक करती थी, साथ ही इंडिया गठबंधन में विपक्ष का एक मजबूत चेहरा है। ऐसे में देखे तो पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम केवल एक राज्य की सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।








