Jharkhand News: झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में इन दिनों जंगली हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे की बात की जाए तो दो अलग-अलग जगहों पर हाथियों ने वृद्धा समेत दो को हाथी ने मार डाला है। जबकि आईईडी की चपेट में आने से एक हाथी घायल हुआ है। इसमें अधेड़ समेत दो लोग शामिल हैं। घटना के बाद से एक तरफ इलाके में खौफ का माहौल है, तो वहीं दूसरी तरफ कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर वन विभाग कोल्हान के क्षेत्र में क्या कर रहा है।
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Jharkhand News: समस्या से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कराया अवगत
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड राबता हज कमेटी के अध्यक्ष सह कांग्रेसी नेता हाजी मतलूब इमाम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इस समस्या से अवगत कराया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां के अंतर्गत हाथियों के संबंध में ऐसे समाचार लगातार मिल रहे हैं कि यहां का वन विभाग गंभीर नहीं है और जनता परेशान है। इसलिए मुख्यमंत्री स्वयं इस ओर ध्यान देने की कृपा करें।
Jharkhand News: वृद्धा समेत दो को हाथी ने मार डाला
आपको बता दें कि हाथियों ने पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड के चौठिया गांव और सरायकेला-खरसावां जिले के कुकड़ प्रखंड में एक वृद्धा और एक व्यक्ति को कुचलकर मार डाला। चाकुलिया में दुलारी मुर्मू नामक वृद्धा कच्ची सड़क से जा रही थीं, तभी अचानक सामने आए हाथी ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दूसरी घटना कुकड़ प्रखंड की है, जहां मुनिराम गोराई को हाथी ने कुचलकर मार डाला।
Jharkhand News: करोड़ों रुपए खर्च फिर भी ना हाथी सुरक्षित ना इंसान
देखा जाए तो कोल्हान में हाथियों का उत्पात रोकने के लिए वन विभाग ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं, लेकिन यह राशि जमीनी स्तर पर असर दिखाती नजर नहीं आ रही। न तो यहां हाथी सुरक्षित हैं और न ही इंसान। सवाल यह है कि जब विभाग उत्पात रोकने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करता है, तो उसका परिणाम दिखाई क्यों नहीं देता। वन विभाग द्वारा सोलर लाइट, मधुमक्खी पालन और सोलर फेंसिंग जैसी योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन ये सभी योजनाएं बेअसर साबित हो रही हैं। कोल्हान में हाथियों के हमले से जहां आम लोगों की जान जा रही है, वहीं हाथी भी विभिन्न कारणों से घायल हो रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि हाथियों के नाम पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपए आखिर जा कहां रहे हैं। न इंसान सुरक्षित है, न हाथी।








