Jharkhand के सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे लगातार बड़े अभियान का असर अब माओवादी संगठन पर साफ दिखाई देने लगा है। एक करोड़ के इनामी नक्सली नेता मिसिर बेसरा के दस्ते में भारी बेचैनी और डर का माहौल बताया जा रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों की मजबूत घेराबंदी और लगातार सर्च ऑपरेशन के कारण संगठन के कई सदस्य अब जंगल छोड़ने और आत्मसमर्पण की राह तलाश रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक मिसिर बेसरा के दस्ते में फिलहाल करीब 53 नक्सली सक्रिय हैं। इनमें से 20 से अधिक सदस्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले एक सप्ताह के भीतर इनमें से कई नक्सली आत्मसमर्पण कर सकते हैं। लगातार चल रहे ऑपरेशन, जंगलों में बढ़ती निगरानी और सप्लाई नेटवर्क के टूटने से संगठन की स्थिति कमजोर पड़ती जा रही है। खाने-पीने की सामग्री, हथियार और दवाइयों की सप्लाई प्रभावित होने लगी है, जिसका असर नक्सलियों के मनोबल पर भी दिखाई दे रहा है।
कई बड़े इनामी नक्सली पुलिस के संपर्क में
सूत्रों के अनुसार पुलिस के संपर्क में आए नक्सलियों में कई बड़े इनामी कमांडरों के नाम शामिल हैं। इनमें 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर अश्विन, 10 लाख का इनामी चंदन लोहरा, पांच लाख का इनामी सोहन पुनेई उर्फ रंगा, सब-जोनल कमांडर माधई पात्रा, दो लाख की इनामी रजनी मुदगम और सलोनी मुंडा उर्फ पारूल जैसे नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा दस्ते के कई अन्य सदस्य भी सुरक्षा एजेंसियों से बातचीत कर रहे हैं और मुख्यधारा में लौटने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
60 से ज्यादा सुरक्षा कैंपों से घिरा सारंडा
इधर, सुरक्षा बलों ने सारंडा और आसपास के इलाकों में अभियान और तेज कर दिया है। जंगल के अलग-अलग हिस्सों में फिलहाल 60 से अधिक सुरक्षा कैंप बनाए गए हैं। इन कैंपों के जरिए जवान लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और नक्सलियों की मूवमेंट को पूरी तरह सीमित करने की रणनीति पर काम हो रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस बार संगठन को बड़ा झटका लग सकता है।
मिसिर बेसरा पर बढ़ा दबाव
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि मिसिर बेसरा फिलहाल आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं है। हालांकि उसके दस्ते में लगातार बढ़ रही टूट और सदस्यों के सरेंडर की तैयारी ने उसे भी दबाव में ला दिया है। सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि अगर इसी तरह अभियान जारी रहा तो या तो मिसिर बेसरा किसी एनकाउंटर में मारा जा सकता है या फिर उसे भी आत्मसमर्पण करना पड़ सकता है।
इजराइल की मौत के बाद बढ़ा डर
दरअसल, हाल के दिनों में एक लाख के इनामी नक्सली इजराइल के मारे जाने के बाद संगठन के भीतर डर और अस्थिरता बढ़ी है। उसकी मौत के बाद कई नक्सलियों ने महसूस किया कि अब जंगल में टिके रहना आसान नहीं है। यही वजह है कि संगठन के भीतर सरेंडर की चर्चा तेज हो गई है।
जून तक नक्सल मुक्त झारखंड की उम्मीद
फिलहाल Jharkhand में सारंडा ही ऐसा बड़ा इलाका बचा है जहां नक्सलियों की मौजूदगी मानी जा रही है। लेकिन जिस तरह से सुरक्षा बल लगातार जंगल में सक्रिय हैं और अभियान चला रहे हैं, उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जून के पहले सप्ताह तक झारखंड को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने की दिशा में बड़ी सफलता मिल सकती है।








