Delhi High Court ने निजी स्कूलों को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में फीस बढ़ाने के लिए स्कूलों को शिक्षा निदेशालय (DoE) से पहले अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। कोर्ट ने फीस वृद्धि को लेकर जारी कई सर्कुलरों को भी रद्द कर दिया है।
Delhi High Court के न्यायमूर्ति Justice Anoop Jairam Bhambhani ने 120 पन्नों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम की धारा 17(3) के तहत निजी स्कूलों की जिम्मेदारी केवल इतनी है कि वे नए सत्र से पहले प्रस्तावित फीस का विवरण शिक्षा निदेशालय को सौंपें।
सत्र शुरू होने के बाद फीस बढ़ाने पर लगेगी रोक
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद फीस बढ़ाई जाती है, तब स्कूलों को पूर्व अनुमति लेनी होगी। अदालत ने माना कि शिक्षा निदेशालय ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की और सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के पुराने फैसलों की अनदेखी की, जिससे अभिभावकों और स्कूलों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
अप्रैल 2027 से लागू होगी नई फीस
हाई कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए निर्देश दिया कि विभिन्न निजी स्कूलों द्वारा प्रस्तावित अंतिम फीस वृद्धि अप्रैल 2027 से लागू होगी। साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि स्कूल पिछली शैक्षणिक अवधि के लिए किसी भी छात्र या अभिभावक से बकाया फीस या अतिरिक्त शुल्क की वसूली नहीं कर सकेंगे।
अधिशेष फंड होना मुनाफाखोरी नहीं
अदालत ने कहा कि किसी स्कूल के पास अधिशेष फंड (Surplus Fund) होना केवल इस आधार पर यह साबित नहीं करता कि वह व्यावसायीकरण या मुनाफाखोरी कर रहा है। यदि ऐसे आरोप लगते हैं तो शिक्षा निदेशालय को विधिवत वित्तीय ऑडिट कराना होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि निजी स्कूलों को वित्तीय स्वायत्तता प्राप्त है और शिक्षा निदेशालय उनके वित्तीय मामलों में माइक्रो-मैनेजमेंट नहीं कर सकता।
Land Clause वाले और बिना Land Clause वाले स्कूलों पर समान नियम
फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि Land Clause वाले और बिना Land Clause वाले निजी स्कूलों के संबंध में शिक्षा निदेशालय की शक्तियों में कोई अंतर नहीं है। हालांकि, यदि किसी ऑडिट में मुनाफाखोरी के संकेत मिलते हैं, तो निदेशालय संबंधित भूमि आवंटन एजेंसी को कार्रवाई के लिए सूचित कर सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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