Koderma: एक तरफ जहां दुनिया डिजिटल क्रांति और आधुनिक सुविधाओं की बात कर रही है, वहीं झारखंड के कोडरमा जिले से एक दुखदाक तस्वीर सामने आई है जहां कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड अंतर्गत डगरनवां पंचायत के कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांवों में आजादी के 75 वर्ष बाद भी विकास की किरण नहीं पहुंच पाई है। घने जंगलों के बीच बसे इन गांवों के लगभग एक दर्जन परिवारों के 100 से ज्यादा लोग पिछले 20 वर्षों से बूंद-बूंद पानी और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
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पानी के लिए रोज की ‘जद्दोजहद’: 1 किलोमीटर का सफर और ‘चुआं’ का सहारा
इन गांवों की सबसे बड़ी त्रासदी पीने का साफ पानी न होना है। यहां की महिलाओं का दिन घरेलू कामों से नहीं, बल्कि पानी की तलाश से शुरू होता है। सिर पर बर्तन रखे महिलाएं पथरीले और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों से होते हुए करीब 1 किलोमीटर दूर ‘सोती नाला’ पहुंचती हैं।
हैरानी की बात यह है कि इस इलाके में पानी का कोई कुआं या चापाकल (हैंडपंप) नहीं है। महिलाएं नाले के पास रेत में ‘चुआं’ (छोटा गड्ढा) खोदती हैं और घंटों इंतजार कर झिरने वाले मटमैले पानी को जमा करती हैं। यही वह पानी है जिसे जंगली जानवर भी पीते हैं और ग्रामीण भी खाना बनाने व अपनी प्यास बुझाने के लिए इस्तेमाल करने को मजबूर हैं।
Koderma: बरसात और गर्मी में स्थिति हो जाती है और भयावह
गांव की स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे लोग 20 साल पहले सिमरकुंडी गांव छोड़कर यहां आकर बसे थे, तब से लेकर आज तक उनकी स्थिति जस की तस बनी हुई है। गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे जाने से चुआं सूखने लगते हैं, जिससे पानी की किल्लत और बढ़ जाती है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी विकराल हो जाती है। नाले में पानी भरने के कारण चुआं खोदने की जगह भी नहीं बचती। ऐसे में ग्रामीणों को नदी-नाले का मटमैला पानी छानकर पीना पड़ता है।
दूषित पानी से बढ़ रहा बीमारियों का ग्राफ: ग्रामीणों के अनुसार, लगातार गंदा पानी पीने के कारण गांव के बच्चे और बड़े अक्सर गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। गांव में स्वास्थ्य केंद्र न होने और जर्जर रास्तों के कारण मरीजों को इलाज के लिए मीलों दूर मरकच्चो जाना पड़ता है।
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‘ढिबरी युग’ में जीने को मजबूर ग्रामीण
मुख्य रूप से मजदूरी और थोड़ी बहुत खेती पर निर्भर इन ग्रामीणों के पास न तो आने-जाने के लिए पक्की सड़क है और न ही बिजली की व्यवस्था। डिजिटल इंडिया के दौर में भी यह पूरा गांव आज ‘ढिबरी युग’ (मिट्टी के तेल के दीये) में जीने को विवश है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपनी इन समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन से कई बार गुहार लगाई, लेकिन आज तक उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद एक्शन में आए CM हेमंत सोरेन
मरकच्चो के कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांव में आधारभूत सुविधाओं के अभाव की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया। सीएम ने कोडरमा के उपायुक्त (डीसी) को ट्वीट कर इस संबंध में त्वरित और आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
कोडरमा डीसी उत्कर्ष गुप्ता ने दिए जांच के आदेश
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कोडरमा के उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता तुरंत एक्शन में आए। उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आते ही सतगावां प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को एक विशेष टीम के साथ मौके पर भेजा गया है।
उपायुक्त का बयान: “जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों से तालमेल बिठाकर जल्द ही कारी पहाड़ी और चटनिया दह गांव में पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।”
इसके साथ ही, कोडरमा की कई सामाजिक संस्थाएं और कार्यकर्ता भी जिला प्रशासन के साथ मिलकर इन दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों में मूलभूत ढांचा तैयार करवाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन की इस पहल से इन 100 ग्रामीणों के जीवन में विकास का उजाला कब तक पहुंच पाता है।








