Hazaribagh: हजारीबाग जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। पिछले पांच दिनों से लापता एक 14 वर्षीय नाबालिग बच्ची का शव देर रात सिंदूर तालाब से बरामद किया गया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
बताते चलें कि मासूम बच्ची अपने 4 साल के छोटे भाई के साथ बीते 27 मई से लापता थी। बच्ची का शव मिलने के बाद एक बार फिर हजारीबाग के चर्चित ‘पौता जंगल कांड’ की खौफनाक यादें ताजा हो गई हैं, जहां तीन लोगों की संदिग्ध मौत का रहस्य आज भी अनसुलझा है।
थानों के चक्कर काटते रहे बेबस पिता, नहीं दर्ज हुई जीरो FIR
मृतक बच्ची का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फैजाबाद (अयोध्या) का रहने वाला है, जो हजारीबाग के कूद क्षेत्र में रहकर लाइट वाले गुब्बारे और खिलौने बेचकर अपना गुजारा करता है। पीड़ित पिता का आरोप है कि बच्चे जैसे ही लापता हुए, उन्होंने सदर थाना, लोहसिंघना थाना और कटकमदाग थाना के कई चक्कर लगाए।
उन्होंने पुलिस को एक मुख्य संदिग्ध का नाम भी बताया था, लेकिन पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और न ही तत्काल ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की। परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस पहले दिन सक्रिय होती, तो आज उनकी बेटी जिंदा होती।
शव की स्थिति संदिग्ध, 4 साल के मासूम भाई की तलाश जारी
परिजनों का दावा है कि तालाब से मिले बच्ची के शव की स्थिति अत्यंत संदिग्ध है, जिससे उसके साथ किसी गंभीर अपराध या दरिंदगी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। इस पूरे मामले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि बच्ची के साथ लापता हुआ उसका 4 वर्षीय छोटा भाई अब भी गायब है।
पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने हजारीबाग पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और लापता मासूम बच्चे को जल्द से जल्द सुरक्षित बरामद किया जाए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच और बच्चे की तलाश में जुटी है।








