‘Maa Behen’ Movie: नेटफ्लिक्स (Netflix) पर थ्रिलर और डार्क कॉमेडी का तड़का लगाने आ चुकी है फिल्म ‘मां-बहन’ (Maa Behen)। सुरेश त्रिवेणी के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित, नेशनल क्रश तृप्ति डिमरी और सोशल मीडिया सेंसेशन धारणा दुर्गा मुख्य भूमिकाओं में हैं। 2 घंटे 7 मिनट की यह फिल्म क्या आपको इस वीकेंड देखनी चाहिए या नहीं? आइए जानते हैं इस विस्तृत Maa Behen Movie के बारे में।
‘मां-बहन’ (Maa Behen) फिल्म डिटेल्स
| पैरामीटर | डिटेल्स |
| प्लेटफॉर्म | नेटफ्लिक्स (Netflix) |
| डायरेक्टर | सुरेश त्रिवेणी |
| मुख्य कलाकार | माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी |
| कैमियो | परेश रावल |
| रनटाइम | 2 घंटे 7 मिनट |
| जॉनर | डार्क कॉमेडी, क्राइम, मर्डर मिस्ट्री |
| IMDb रेटिंग | 5.7/10 |
कहानी घूमती है रेखा (माधुरी दीक्षित) और उनकी दो बेटियों – जया (तृप्ति डिमरी) और सुषमा (धारणा दुर्गा) के इर्द-गिर्द। रेखा एक विधवा महिला है जो समाज और रूढ़िवादी सोसाइटी की परवाह किए बिना अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती है। उसकी बड़ी बेटी जया अपनी शादीशुदा जिंदगी और आईवीएफ (IVF) के खर्चों को लेकर आर्थिक तंगी से जूझ रही है, जबकि छोटी बेटी सुषमा सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर फॉलोअर्स जुटाने में बिजी है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब एक दिन अचानक रेखा के किचन में उनके पड़ोसी गुप्ता जी (रवि किशन) की डेड बॉडी मिलती है। रेखा इसे एक हादसा बताती है, लेकिन पुलिस को बुलाने के बजाय ये तीनों मां-बेटियां खुद ही इस मुसीबत से निपटने का फैसला करती हैं। सस्पेंस तब और बढ़ जाता है जब ठीक सामने गुप्ता जी के घर में उनकी बेटी की सगाई चल रही होती है। इसके बाद शुरू होता है झूठ, गलतफहमियों और डार्क ह्यूमर का एक ऐसा सिलसिला जो कहानी को आगे बढ़ाता है।
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फिल्म की सबसे बड़ी ताकत: स्टार कास्ट की एक्टिंग
1. माधुरी दीक्षित का अनोखा अंदाज
माधुरी दीक्षित को पर्दे पर देखना हमेशा एक ट्रीट होता है। लेकिन इस फिल्म में वह किसी आदर्श मां या रोती-धोती विधवा के रूप में नहीं, बल्कि एक बेहद प्रैक्टिकल और बिंदास महिला के रोल में हैं। उन्होंने रेखा के किरदार को बिना लाउड हुए बेहद संजीदगी और मजेदार ढंग से निभाया है।
2. तृप्ति डिमरी का सबसे प्रभावशाली काम
फिल्म का इमोशनल कोर तृप्ति डिमरी के कंधों पर है। जया के रूप में उनकी झुंझलाहट, थकान और चेहरे की बेचैनी साफ नजर आती है। कई सीन्स में उन्होंने बिना डायलॉग के भी बेहतरीन काम किया है।
3. सपोर्टिंग कास्ट का दमदार तड़का
- धारणा दुर्गा: सोशल मीडिया स्टार धारणा ने फिल्म में कमाल की एनर्जी जोड़ी है।
- रवि किशन: निगेटिव और सस्पेंस से भरे इस रोल में रवि किशन ने अपनी डायलॉग डिलीवरी से स्क्रीन पर कब्जा कर लिया है।
- गीतांजलि कुलकर्णी: ‘गुल्लक’ फेम गीतांजलि ने एक चिढ़चिढ़ी पड़ोसी के रूप में महफिल लूट ली है। उनके आते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
- परेश रावल व अरुणोदय सिंह: परेश रावल का कैमियो छोटा है, लेकिन ठीक-ठाक है। अरुणोदय सिंह और जतिन सरना ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है।
समाज की सोच पर करारा तंज और डार्क ह्यूमर
डायरेक्टर सुरेश त्रिवेणी ने कहानी के जरिए समाज की दोहरी मानसिकता पर हल्का लेकिन गहरा तंज कसा है। एक सिंगल या विधवा महिला अगर सजे-संवरे और अपने मन की करे, तो पूरी कॉलोनी उसे शक की निगाह से देखती है। फिल्म बिना किसी भारी-भरकम भाषण के इस सोच को दर्शकों के सामने रखती है। फिल्म का डार्क ह्यूमर कई जगह बेहद शानदार है, खासकर तब जब तीनों महिलाएं लाश को ठिकाने लगाने के चक्कर में हालात को और उलझा देती हैं।
फिल्म का फर्स्ट हाफ जितना कड़क है, इंटरवल के बाद रफ्तार उतनी ही धीमी हो जाती है। सेकेंड हाफ में कुछ हिस्से जरूरत से ज्यादा लंबे और खींचे हुए महसूस होते हैं। जिन सामाजिक मुद्दों को फिल्म छूती है, उन्हें थोड़ा और गहराई से दिखाया जा सकता था। यही वजह है कि बेहतरीन आइडिया होने के बावजूद फिल्म कुछ जगहों पर फीकी पड़ जाती है।
‘मां-बहन'(Maa Behen) फिल्म एक अच्छी और वन-टाइम वॉच मनोरंजन फिल्म है। माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की जुगलबंदी इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है। अगर आपको किरदारों पर आधारित कहानियां, सस्पेंस मर्डर मिस्ट्री और डार्क कॉमेडी जॉनर पसंद है, तो नेटफ्लिक्स पर यह 2 घंटे 7 मिनट की फिल्म आपके वीकेंड का अच्छा टाइमपास बन सकती है। यह भीड़ से थोड़ी अलग फिल्म है जो अंत तक आपका ध्यान खींचकर रखती है।
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