झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्यसभा चुनाव के लिए वरिष्ठ नेता और लातेहार विधायक बैजनाथ राम के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी है। पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद बैजनाथ राम एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। तीन बार विधायक रह चुके और झारखंड सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके बैजनाथ राम को झामुमो के प्रमुख दलित चेहरों में गिना जाता है। ऐसे में हर किसी के मन में एक ही सवाल है— आखिर कौन हैं बैजनाथ राम, जिन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो नेतृत्व ने राज्यसभा के लिए भरोसा जताया है? आइए जानते हैं उनके राजनीतिक सफर, संघर्ष, उपलब्धियों और झारखंड की राजनीति में उनकी भूमिका के बारे में।
कौन हैं बैजनाथ राम?
बैजनाथ राम झारखंड की राजनीति का एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले बैजनाथ राम ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर से की और धीरे-धीरे खुद को पलामू प्रमंडल के प्रभावशाली नेताओं में स्थापित किया। सादगीपूर्ण जीवनशैली, क्षेत्र में लगातार सक्रियता और दलित समाज के मुद्दों को उठाने के कारण उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
करीब तीन दशक लंबे राजनीतिक सफर में उन्होंने विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ काम किया और हर दौर में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखी। यही वजह है कि उन्हें झारखंड की राजनीति का एक अनुभवी और संतुलित नेता माना जाता है।
जनता दल से भाजपा और फिर JMM तक का सफर
बैजनाथ राम का शुरुआती राजनीतिक सफर जनता दल (यू) से जुड़ा रहा। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा और जल्द ही पार्टी के प्रमुख दलित नेताओं में शामिल हो गए।
भाजपा के साथ रहते हुए उन्होंने संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी पहचान एक ऐसे नेता की बनी जो ग्रामीण इलाकों, दलित समाज और आम जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाते थे।
वर्ष 2019 में जब भाजपा ने लातेहार विधानसभा सीट से उनका टिकट काट दिया, तब उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद वे झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गए। हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने उन्हें लातेहार से उम्मीदवार बनाया और उन्होंने जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत का फिर से प्रमाण दिया।
तीन बार विधायक रहे हैं बैजनाथ राम
बैजनाथ Ram का चुनावी रिकॉर्ड उनके राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
विधायक के रूप में कार्यकाल
- 2000–2005 : पहली बार विधायक, लातेहार विधानसभा क्षेत्र
- 2009–2014 : भाजपा के टिकट पर विधायक
- 2019–वर्तमान : झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक
तीन बार विधानसभा पहुंचने वाले बैजनाथ राम उन नेताओं में शामिल हैं जिनकी क्षेत्र में मजबूत जनाधार वाली छवि रही है।
मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं
विधायक के साथ-साथ बैजनाथ राम झारखंड सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं।
उन्होंने वर्ष 2010 से 2013 के बीच झारखंड सरकार में मानव संसाधन विकास (शिक्षा) विभाग के राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। मंत्री रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, विद्यालयों की आधारभूत संरचना और ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार जैसे विषयों पर काम किया।
सरकार और संगठन दोनों का अनुभव रखने वाले नेताओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
क्यों बढ़ रही है राज्यसभा की चर्चा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव में झामुमो सामाजिक संतुलन, दलित प्रतिनिधित्व और अनुभवी नेतृत्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रख सकती है। ऐसे में बैजनाथ राम का नाम सबसे स्वाभाविक दावेदारों में उभर रहा है।
इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं—
- तीन दशक से अधिक का राजनीतिक अनुभव
- तीन बार विधायक रहने का रिकॉर्ड
- मंत्री पद संभालने का अनुभव
- अनुसूचित जाति समुदाय में मजबूत पकड़
- पलामू प्रमंडल में प्रभावशाली राजनीतिक आधार
- भाजपा और झामुमो दोनों के साथ काम करने का अनुभव
- संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका
2024 में भी चर्चा में रहे थे
फरवरी 2024 में जब चंपाई सोरेन सरकार का गठन हुआ था, तब बैजनाथ राम का नाम मंत्री पद के संभावित दावेदारों में सबसे आगे माना जा रहा था। हालांकि अंतिम समय में उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी। उस समय उनकी नाराजगी भी सार्वजनिक रूप से सामने आई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि उस समय मंत्री पद नहीं मिलने के बाद पार्टी नेतृत्व किसी वरिष्ठ और अनुभवी नेता को बड़ी जिम्मेदारी देना चाहता है, तो राज्यसभा एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है।
राज्यसभा की दौड़ में सबसे मजबूत दावेदार?
हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और गठबंधन स्तर पर होना है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बैजनाथ राम का नाम सबसे गंभीरता से लिया जा रहा है। झामुमो के वरिष्ठ दलित चेहरे, तीन बार विधायक, पूर्व मंत्री और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण उनका दावा अन्य संभावित नामों की तुलना में मजबूत माना जा रहा है।
आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन झारखंड की राजनीति में यह चर्चा तेजी से जोर पकड़ रही है कि यदि झामुमो सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को प्राथमिकता देती है, तो बैजनाथ राम का राज्यसभा पहुंचने का रास्ता काफी हद तक साफ दिखाई दे रहा है।








