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नई दिल्ली: सीनियर जर्नलिस्ट अंजना ओम कश्यप और TV Today Network Ltd. ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण मानहानि याचिका दायर की है। इस याचिका में यूट्यूब पर लोकप्रिय एजुकेटर खान सर (फैसल खान), अभिनय मैथ्स, बबीता त्यागी समेत कुल 8 लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। यह मामला वर्तमान में अदालत में विचाराधीन (sub judice) है।
मामले की पृष्ठभूमि
इस विवाद की जड़ें NEET परीक्षा के कथित प्रश्नपत्र लीक और शिक्षा प्रणाली पर आयोजित एक टीवी चर्चा से जुड़ी हैं। कार्यक्रम के दौरान की गई टिप्पणियों के विरोध में खान सर और अन्य शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किए थे, जिसमें मीडिया की निष्पक्षता और भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसी प्रतिक्रियात्मक वीडियो श्रृंखला के बाद यह कानूनी विवाद उत्पन्न हुआ।
कानूनी विवरण और याचिकाकर्ताओं के दावे
दिल्ली हाईकोर्ट की 8 जून 2026 की वाद सूची (cause list) के अनुसार, यह मामला केस नंबर CS(OS)-538/2026 के रूप में दर्ज है, जिसकी सुनवाई जस्टिस नीना बंसल कृष्ण की अदालत में निर्धारित थी। लगभग 330 पृष्ठों की इस विस्तृत याचिका में कथित तौर पर मानहानिकारक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

याचिका की प्रमुख मांगें
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रतिवादियों ने दुर्भावनापूर्ण टिप्पणियों के माध्यम से उनकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है। इसके समाधान हेतु निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
- YouTube, Meta (Facebook/Instagram) और X (Twitter) से संबंधित सामग्री हटाई जाए
- ₹2 करोड़ का हर्जाना (damages) दिया जाए
विशेष ध्यान दें: उपर्युक्त बिंदु याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए केवल आरोप हैं। अदालत ने अभी तक इन दावों की सत्यता की पुष्टि नहीं की है।
सत्यापित और आधिकारिक तथ्य
- दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक cause list में CS(OS)-538/2026 केस की लिस्टिंग 8 जून 2026 को हुई है।
- यह एक सिविल मानहानि याचिका है। इस मामले में कोई FIR दर्ज होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।
- केस Justice Neena Bansal Krishna की अदालत में सूचीबद्ध था।
घटनाक्रम का विवरण (Timeline)
- मई 2026: NEET पेपर लीक के विषय पर अंजना ओम कश्यप द्वारा टीवी डिबेट का आयोजन।
- मई-जून 2026: खान सर एवं अन्य यूट्यूब शिक्षकों के प्रतिक्रियात्मक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित।
- जून 2026 (प्रारंभ): दिल्ली हाईकोर्ट में नागरिक मानहानि याचिका (Civil Suit) दायर।
- 8 जून 2026: वाद सूची (Cause List) में मामला पहली बार सूचीबद्ध।
- वर्तमान स्थिति: कानूनी प्रक्रिया जारी है; अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।
यह मामला मुख्यधारा मीडिया की जिम्मेदारी और तेजी से बढ़ते डिजिटल शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के बीच के वैचारिक तनाव को प्रदर्शित करता है। जहां एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19) सर्वोपरि है, वहीं व्यक्तिगत और व्यावसायिक प्रतिष्ठा की रक्षा भी आवश्यक है।
कानूनी प्रक्रिया के प्रति सम्मान बनाए रखते हुए, अब यह माननीय न्यायालय पर निर्भर है कि वह दोनों पक्षों के तथ्यों और दलीलों का सूक्ष्मता से परीक्षण कर न्यायसंगत निर्णय ले। फिलहाल, सभी संबंधित पक्षों के लिए धैर्य और न्यायिक मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है।
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