Ranchi: विद्या भारती, झारखंड द्वारा आयोजित नवीन आचार्य प्रशिक्षण वर्ग, स्थायित्व आचार्य प्रशिक्षण वर्ग एवं कार्यालय कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग का समापन शनिवार को श्री कृष्णचंद्र गांधी शैक्षिक नगर, कुदलुम (रांची) में संपन्न हुआ। राज्यभर से आए लगभग 500 आचार्यों की सहभागिता वाले इस प्रशिक्षण वर्ग के समापन समारोह में शिक्षा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता गोपाल शर्मा ने कहा कि आचार्य केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज का नेतृत्व करने वाला होता है। अपने आदर्श आचरण, संस्कारों और सद्गुणों के माध्यम से वह समाज को दिशा देने और उसे संस्कारित बनाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक को विषय ज्ञान के साथ-साथ अपने जीवन से भी विद्यार्थियों के सामने आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
गोपाल शर्मा ने कहा कि करुणा, दया, निस्वार्थ सेवा और श्रेष्ठ व्यवहार जैसे गुण एक आचार्य को समाज में विशिष्ट स्थान दिलाते हैं। आचार्य विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, सामाजिक उत्तरदायित्व और देशहित की भावना विकसित करता है तथा उन्हें अपसंस्कृति से दूर रखने का प्रयास करता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” के आदर्शों पर आधारित समाज है, जहां मातृशक्ति, प्रकृति और सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान किया जाता है।
कार्यक्रम में विषय प्रवेश कराते हुए विद्या भारती के सचिव नकुल कुमार शर्मा ने प्रशिक्षण वर्ग की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान और अनुभव का उपयोग विद्यालयों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्य ज्ञान तक सीमित नहीं होता, बल्कि अपने व्यवहार और व्यक्तित्व से विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस अवसर पर प्रशिक्षण वर्ग के आचार्यों द्वारा तैयार तीन हस्तलिखित पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया। इनमें पीआरटी एवं वाटिका वर्ग, टीजीटी एवं पीजीटी वर्ग तथा स्थायित्व प्रशिक्षण वर्ग के आचार्यों द्वारा तैयार पत्रिकाएं शामिल थीं।
समारोह में मार्गदर्शक के रूप में मनोज भारद्वाज, तुलसी ठाकुर, विवेक नयन पांडे और नीरज कुमार लाल उपस्थित रहे। वहीं क्षेत्र संगठन मंत्री ख्यालीराम, विद्या विकास समिति झारखंड के कोषाध्यक्ष विष्णु जालान तथा सह मंत्री डॉ. पूजा विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए रामअवतार नारसरिया ने कहा कि शिक्षण कार्य ईश्वरीय कार्य है और विद्या भारती से जुड़े आचार्य स्वेच्छा से राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्या भारती पिछले लगभग 75 वर्षों से पंचकोशीय एवं पंचपदी शिक्षा पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने आचार्यों से आह्वान किया कि वे “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ विद्यार्थियों का निर्माण करें और देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम का संचालन विभाग निरीक्षक अखिलेश कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विद्या भारती के पूर्णकालिक कार्यकर्ता सुरेश मंडल ने किया। वंदे मातरम् के साथ समारोह का समापन हुआ।
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक। झारखंड, बिहार और राष्ट्रीय राजनीति, शिक्षा, प्रशासनिक मामलों और विकास नीतियों पर 10+ वर्षों का जमीनी पत्रकारिता अनुभव। निष्पक्ष और प्रमाणिक समाचार रिपोर्टिंग के लिए समर्पित।









