रांची: राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में 16 जुलाई को आयोजित होने वाली Jagannath Rath Yatra 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और रंग-बिरंगी सजावट से सुसज्जित किया गया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के रथयात्रा में शामिल होने की उम्मीद है। मंदिर समिति और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं।
आज शाम होगा भगवान जगन्नाथ का नेत्रदान महोत्सव
रथयात्रा से एक दिन पहले, 15 जुलाई (बुधवार) की शाम 4 बजे भगवान जगन्नाथ के नेत्रदान महोत्सव का आयोजन होगा। स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों के एकांतवास (अनसर काल) के उपरांत भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा पहली बार दर्शन मंडप में भक्तों को दर्शन देंगे।
इस दौरान भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाएंगे, नेत्रों का अलंकरण किया जाएगा और शंख व पद्म धारण कराए जाएंगे। यह अनुष्ठान रथयात्रा से पहले का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है।
108 दीपों की महाआरती और विशेष भोग का आयोजन
शाम 5 बजे मंदिर परिसर में 108 दीपों से भव्य महाआरती होगी। इसके बाद भगवान को मालपुआ, इलायची दाना, बादाम, आम, कटहल और अनानास सहित विभिन्न प्रकार के विशेष भोग अर्पित किए जाएंगे। इस धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
16 जुलाई को शाम 5 बजे निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा
गुरुवार, 16 जुलाई को सुबह नियमित पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 2 बजे तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा भव्य रथ पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे।
शाम 5 बजे ऐतिहासिक रथयात्रा का शुभारंभ होगा। इस वर्ष आयोजन का विशेष आकर्षण 501 दंपतियों द्वारा सामूहिक विष्णु सहस्त्रनाम पाठ रहेगा, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होगा।
रथ और मंदिर परिसर को दिया गया भव्य स्वरूप
रथयात्रा को लेकर कलाकार मंगलवार देर रात तक रथ को अंतिम रूप देने में जुटे रहे। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने सुरक्षा, ट्रैफिक नियंत्रण, चिकित्सा और पेयजल सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।
हर वर्ष की तरह इस बार भी रांची का जगन्नाथपुर मंदिर भक्ति, आस्था और उत्साह का केंद्र बनेगा, जहां हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन और रथ खींचने का पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।









