Sonam Wangchuk Letter: करीब तीन सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अब अपना अनशन समाप्त करने का संकेत दिया है। हालांकि उन्होंने इसके लिए सरकार के सामने तीन नई शर्तें रखी हैं। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इन नई शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का सीधा उल्लेख नहीं है, जबकि 28 जून को शुरू हुए आंदोलन की प्रमुख मांग यही थी।
इसी वजह से राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर इसे वांगचुक के रुख में बड़ा बदलाव या ‘यू-टर्न‘ बताया जा रहा है। हालांकि वांगचुक ने अपनी नई अपील में शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही और छात्रों के मुद्दों को ही आंदोलन का मूल उद्देश्य बताया है।
Sonam Wangchuk Letter: अस्पताल से जारी पत्र में रखीं ये 3 शर्तें
WHEN WILL I END THE FAST….!
Not withstanding my health my fast continues till after the Sansad Chalo March, and will be broken only under the following circumstances… pic.twitter.com/kaOGx2Nk4T— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
सफदरजंग अस्पताल से जारी अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार उनकी तीन में से किसी एक शर्त को भी स्वीकार कर लेती है, तो वह 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर देंगे।
पहली शर्त
सरकार सार्वजनिक रूप से शिक्षा व्यवस्था में हुई हालिया विफलताओं, पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
दूसरी शर्त
यदि वह और CJP (Campaign for Justice in Education) के प्रतिनिधि संसद तक पहुंचते हैं और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद इस मुद्दे को संसद में प्रमुखता से उठाने का भरोसा देते हैं, तो वह अनशन समाप्त कर देंगे।
तीसरी शर्त
यदि स्वास्थ्य कारणों से उनका संसद तक जाना संभव नहीं हो, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद अस्पताल आकर छात्रों के मुद्दों को संसद में उठाने का लिखित या स्पष्ट आश्वासन दें।
Sonam Wangchuk Letter: इस्तीफे की मांग गायब, क्यों हो रही है चर्चा?
वांगचुक ने 28 जून को जब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, तब आंदोलन के पोस्टर, बैनर और सार्वजनिक बयानों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुखता से शामिल थी।
लेकिन अब जारी नए पत्र में यह मांग सीधे तौर पर दिखाई नहीं देती। इसके बजाय पूरा जोर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और संसद में इस मुद्दे को उठाने पर दिया गया है। यही वजह है कि इसे लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
‘अवैध हिरासत‘ में होने का लगाया आरोप
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में दावा किया कि वह फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में ‘अवैध हिरासत‘ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
उनका आरोप है कि अस्पताल परिसर में उनकी आवाजाही, लोगों से मिलने, संवाद करने और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता पर प्रशासन ने कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
Sonam Wangchuk Letter: अस्पताल ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन
Sonam Wangchuk is trying hard to see you all! Just submitted a letter to the hospital as his health is good and they claim he is not in detention. So why the restrictions? pic.twitter.com/XqeurZUtoP
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
सोमवार सुबह जारी मेडिकल बुलेटिन में VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि सोनम वांगचुक की स्थिति फिलहाल स्थिर है।
अस्पताल के अनुसार—
- वाइटल पैरामीटर स्थिर हैं।
- ब्लड पैरामीटर की लगातार निगरानी की जा रही है।
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम इलाज कर रही है।
- किसी भी संभावित जटिलता से बचने के लिए निरंतर मेडिकल मॉनिटरिंग आवश्यक है।
किस मुद्दे पर चल रहा है आंदोलन?
सोनम वांगचुक का आंदोलन केवल NEET और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक तक सीमित नहीं है। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं—
- शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करना।
- पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई।
- छात्रों के हितों की सुरक्षा।
- लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा, छठी अनुसूची, राज्य का दर्जा और बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर केंद्र सरकार से सार्थक संवाद।
Sonam Wangchuk Letter: इस बीच छात्र नेताओं ने खत्म की भूख हड़ताल
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इधर, आंदोलन से जुड़े AISA के तीन छात्र नेताओं ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है। वहीं आंदोलन से जुड़े अन्य प्रतिनिधियों की ओर से सरकार के साथ बातचीत की कोशिशें जारी हैं।









