रांची: झारखंड की राजनीति में ब्यूरोक्रेसी को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य सरकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि झारखंड में जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों तक की बात अधिकारियों द्वारा नहीं सुनी जा रही है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि राज्य में ऐसी स्थिति बन गई है जहां कैबिनेट मंत्री तक अपनी समस्याओं को सार्वजनिक रूप से रखने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुशासन के लिए चिंताजनक बताया।
राधाकृष्ण किशोर के मुद्दे पर सरकार को घेरा
प्रदीप सिन्हा ने कहा कि कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण किशोर पिछले करीब एक महीने से लगातार प्रशासनिक स्तर पर सहयोग नहीं मिलने और अपनी उपेक्षा की बात सार्वजनिक मंचों पर उठा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि जब जनता द्वारा चुना गया मंत्री ही अपनी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष कर रहा है, तो आम लोगों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले पर अब तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से न तो कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया आई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार अपने ही सहयोगियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
‘नेता प्रतिपक्ष तक की नहीं सुनी जा रही बात’
भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी अधिकारियों के रवैये को लेकर सार्वजनिक रूप से शिकायत कर चुके हैं। उनके अनुसार, एक संवेदनशील मामले में बाबूलाल मरांडी ने संबंधित डीएसपी से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न तो फोन उठाया गया और न ही व्हाट्सएप संदेश का जवाब दिया गया।
प्रदीप सिन्हा ने कहा कि यदि अधिकारी इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं तो यह संकेत देता है कि उन्हें किसी उच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है।
‘सरकार और अधिकारियों के बीच जवाबदेही खत्म’
BJP नेता ने आरोप लगाया कि राज्य में सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय कमजोर हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार विपक्ष से रचनात्मक सहयोग चाहती है तो संवाद दोनों पक्षों से होना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में महत्वपूर्ण विषयों पर भी केवल पत्राचार का सहारा लेना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में निवेश से जुड़ी एक अहम बैठक के दौरान राज्य के वित्त मंत्री मौजूद होने के बावजूद मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी समिति में शामिल नहीं किया। उनके मुताबिक यह सरकार के भीतर समन्वय की कमी को दर्शाता है।
महागठबंधन में भी मतभेद का दावा
प्रदीप सिन्हा ने कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू के हालिया बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि महागठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की सफलता आपसी विश्वास और बेहतर संवाद पर निर्भर करती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियां अलग तस्वीर पेश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रशासनिक व्यवस्था में तत्काल हस्तक्षेप करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदीप सिन्हा ने कहा कि यदि राज्य के मंत्री और शीर्ष जनप्रतिनिधि ही अधिकारियों तक अपनी बात नहीं पहुंचा पा रहे हैं, तो आम जनता को न्याय मिलने की उम्मीद और भी कमजोर हो जाती है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis









