Ghatshila: घाटशिला प्रखंड में झारखंड सरकार की मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत संचालित बिरसा प्रशिक्षण केंद्र को लेकर विवाद सामने आया है। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके विद्यार्थियों और केंद्र के पूर्व कर्मचारियों ने केंद्र के संचालन में कई तरह की गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए घाटशिला अनुमंडल पदाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इन आरोपों के बाद योजना का संचालन कर रही निर्माण सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुशील कुमार दुबे ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
दरअसल शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत चल रहे प्रशिक्षण केंद्र में विद्यार्थियों से प्लेसमेंट के नाम पर कथित तौर पर एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि योजना सरकार की ओर से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के लिए शुरू की गई है, लेकिन केंद्र में विद्यार्थियों से पैसे लिए जा रहे हैं। इसके अलावा शिकायतकर्ताओं ने परीक्षा में फर्जीवाड़े का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर कोई विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता है तो उसकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड के जरिए परीक्षा में बैठाया जाता है। इसके अलावा प्रशिक्षण पूरा कर चुके करीब 30 विद्यार्थियों को अब तक प्रमाण पत्र नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, इस संबंध में उन्होंने केंद्र में जाकर जानकारी मांगी, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया।
निदेशक सुशील कुमार दुबे ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
इधर, निर्माण सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुशील कुमार दुबे ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था वर्ष 2023 से घाटशिला प्रखंड के गोपालपुर फाटक के पास गुरुनानक मार्केट के द्वितीय तल पर बिरसा प्रशिक्षण केंद्र का संचालन कर रही है। केंद्र का संचालन झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसाइटी यानी JSDMS के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है।
सुशील कुमार दुबे ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सारथी योजना पूरी तरह निःशुल्क है। उनके अनुसार, केंद्र में सामान्य वर्ग के 18 से 35 वर्ष और SC/ST वर्ग के 18 से 50 वर्ष तक के स्थानीय युवक-युवतियों का नामांकन लिया जाता है। उन्होंने कहा कि अब तक केंद्र से सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इनमें से कई युवाओं को नामी कंपनियों में रोजगार मिला है, जबकि कई प्रशिक्षणार्थी स्वरोजगार के जरिए अपनी आजीविका चला रहे हैं।
ऑनलाइन बायोमेट्रिक और लाइव स्ट्रीमिंग का दावा
परीक्षा में फर्जीवाड़े और फर्जी आधार कार्ड से दूसरे व्यक्ति को परीक्षा में बैठाने के आरोप पर निदेशक ने कहा कि केंद्र में प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति ऑनलाइन बायोमेट्रिक प्रक्रिया के जरिए दर्ज होती है। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान पूरे सेंटर की लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से विभाग द्वारा निगरानी की जाती है। ऐसे में प्रक्रिया में किसी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि समय-समय पर विभाग के संबंधित अधिकारियों द्वारा केंद्र का निरीक्षण भी किया जाता है। सुशील कुमार दुबे ने कहा कि पूर्व में जिले के तत्कालीन उपायुक्त अनन्य मित्तल ने भी केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। उनके अनुसार, उस समय शिकायतकर्ता अमित हाजरा और दिनेश बाल्मीकि भी केंद्र में मौजूद थे। निदेशक का दावा है कि निरीक्षण के दौरान तत्कालीन उपायुक्त ने संस्था के काम की प्रशंसा की थी।
पूर्व कर्मचारियों पर भी लगाया गंभीर आरोप
सुशील कुमार दुबे ने कहा कि शिकायत करने वाले दोनों पूर्व कर्मचारी पहले संस्था में काम कर चुके हैं। उनके अनुसार, लगातार खराब प्रदर्शन के कारण कुछ कर्मचारियों को संस्था से सेवा मुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें दोबारा काम पर रखने के लिए संस्था पर दबाव बनाया गया। निदेशक का आरोप है कि जब संस्था दबाव में नहीं आई तो इन्हीं लोगों ने दुर्भावना से ग्रसित होकर कंपनी के खिलाफ झूठी और भ्रामक खबर फैलाकर दबाव बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि संस्था विपरीत परिस्थितियों में भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ केंद्र का संचालन कर रही है। सुशील कुमार दुबे ने कहा कि कंपनी अपनी ओर से लगाए गए आरोपों का खंडन करती है और मामले में जल्द ही संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने जा रही है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।








