Ranchi: राजधानी रांची में आज केंद्र सरकार के खनिज संबंधी संशोधन कानून और प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ आदिवासी महाजुटान सभा का आयोजन किया गया। इस महाजुटान में राज्य भर से विभिन्न हिस्सों से आंदोलनकारी लाखों आदिवासी और कई बड़े नेता शामिल हुए।
महाजुटान में परिसीमन के दौरान अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई। प्रस्ताव में कहा गया कि लोकसभा और विधानसभा की सीटें बढ़ती हैं तो ST आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़नी चाहिए। पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र, ऐतिहासिक पुनर्स्थापन और विशेष प्रावधानों को भी परिसीमन का आधार बनाने की मांग रखी गई।
हस्तांतरित जमीन मूल रैयतों को वापस दिलाने की मांग
सभा ने खान एवं खनिज विकास और विनियमन (MMDR) संशोधन कानून का विरोध करते हुए इसे राज्यों की राजकोषीय स्वतंत्रता, विधायी अधिकार और सहकारी संघवाद को प्रभावित करने वाला बताया।
आदिवासी जमीन के अवैध हस्तांतरण, कब्जे और बिक्री पर रोक लगाने तथा CNT और SPT कानूनों का उल्लंघन कर हस्तांतरित जमीन मूल रैयतों को वापस दिलाने की मांग भी उठी।
पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्रामसभा की सहमति के बिना खनन, जमीन अधिग्रहण और विस्थापन पर रोक लगाने की मांग की गई।
PESA कानून, 1996 और वन अधिकार कानून, 2006 को झारखंड में प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी जोर दिया गया।
महाजुटान में जनगणना फॉर्म में सरना धर्म कोड के लिए अलग कॉलम देने की वर्षों पुरानी मांग भी दोहराई गई।

4 years of experience in journalism. Previously, I worked with organizations such as Swadesh Today, News 11 Bharat, and News 22 Scope. For the past year, I have been working as a content writer at Khabar Mantra.








