झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को आकस्मिक निधन हो गया। शनिवार देर रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसके बाद परिजन उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल लेकर पहुंचे। इलाज के दौरान उनकी स्थिति गंभीर हो गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सुदिव्य सोनू के निधन की खबर सामने आते ही गिरिडीह से लेकर रांची तक राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। अस्पताल के बाहर समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों की भीड़ जुटने लगी। बाद में उनके पार्थिव शरीर को JMM कार्यालय ले जाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम दर्शन किए।
एक दिन पहले तक थे सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की सबसे चौंकाने वाली बात यह भी रही कि निधन से ठीक एक दिन पहले यानी 5 सितंबर को वह शिक्षक दिवस के कार्यक्रमों में शामिल हुए थे।
रिपोर्टों के अनुसार गिरिडीह के इस्लामिया उर्दू मिडिल स्कूल के शताब्दी समारोह में उन्होंने हिस्सा लिया था। कार्यक्रम में शिक्षा के महत्व पर बात करने के साथ स्कूलों को कंप्यूटर उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया गया था।
यानी शनिवार को सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय दिखाई देने वाले सुदिव्य सोनू की उसी रात अचानक तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही घंटों में उनकी मौत की खबर सामने आ गई।

सरकार में संभाल रहे थे कई महत्वपूर्ण विभाग
सुदिव्य कुमार सोनू हेमंत सोरेन सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद और युवा कार्य जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
इस वजह से उनकी भूमिका केवल गिरिडीह के विधायक तक सीमित नहीं थी। शिक्षा, शहरी विकास, पर्यटन और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सरकारी क्षेत्रों में वह जिम्मेदारी निभा रहे थे।

JMM के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान
JMM ने सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उनके जाने को पार्टी, सरकार और झारखंड के लिए बड़ी क्षति बताया। पार्टी ने उन्हें समर्पित साथी और महत्वपूर्ण नेता के रूप में याद किया।
सुदिव्य सोनू लंबे समय से JMM से जुड़े थे और संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। 2019 में गिरिडीह से पहली बार विधायक बनने के बाद 2024 में उन्होंने लगातार दूसरी बार चुनाव जीता और फिर कैबिनेट मंत्री बने।
हेमंत सोरेन के लिए व्यक्तिगत क्षति
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सुदिव्य सोनू के निधन को केवल राजनीतिक नुकसान नहीं बताया। उन्होंने उन्हें बड़े भाई जैसा बताया और कहा कि उनके जाने से उनके जीवन में ऐसी रिक्तता पैदा हुई है जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
निष्कर्ष
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर एक लंबे संगठनात्मक संघर्ष से निकलकर विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा था। उनका अचानक निधन ऐसे समय हुआ जब वह सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे थे और सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय थे। उनके जाने से गिरिडीह, JMM और झारखंड सरकार ने एक सक्रिय राजनीतिक चेहरा खो दिया है।

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