Jharkhand Politics: झारखंड में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के आरोपों पर अब झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने पलटवार किया है। कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने भाजपा पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण के मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा को यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता या मतदाता सूची में उसके नाम को लेकर वास्तविक आपत्ति है, तो इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने भाजपा से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की।
‘प्रमाण है तो सामने लाए भाजपा’
कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता या मतदाता सूची में नाम को लेकर कोई वास्तविक आपत्ति है, तो संबंधित दस्तावेज और प्रमाण के साथ निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि केवल आरोप लगाने से किसी व्यक्ति को घुसपैठिया नहीं कहा जा सकता।
सिन्हा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि साहिबगंज, पाकुड़ और दुमका जैसे जिलों का नाम लेकर पूरे समुदाय को संदेह के घेरे में रखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, कुछ कथित मामलों के आधार पर बड़ी संख्या में लोगों की नागरिकता और निष्ठा पर सवाल उठाना विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा देता है।
RO को लेकर भाजपा के आरोप पर भी कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस नेता ने भाजपा के उस आरोप पर भी सवाल उठाया, जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि RO (Returning Officer) ने पहले ही Form-7 नहीं लेने का फैसला कर लिया है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि अगर भाजपा के पास इस संबंध में कोई ठोस प्रमाण है तो उसे चुनाव आयोग के सामने पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाने से चुनावी प्रक्रिया नहीं चलती।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले भाजपा को अपने आरोपों के समर्थन में तथ्य सामने रखने चाहिए।
‘हर चुनाव में नया डर पैदा करती है भाजपा’
राकेश सिन्हा ने भाजपा पर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुताबिक भाजपा चुनाव के दौरान कभी धर्म तो कभी घुसपैठ जैसे मुद्दों के जरिए राजनीतिक माहौल तैयार करती है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को डर की राजनीति से प्रभावित करने की कोशिश सफल नहीं होगी और मतदाता की पहचान उसके धर्म से नहीं बल्कि उसके संवैधानिक अधिकार से होती है।
SIR पर झारखंड में बढ़ रही राजनीतिक बहस
SIR को लेकर झारखंड में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ रहे हैं। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने भाजपा से मांग की है कि यदि उसके पास कथित घुसपैठ या मतदाता सूची से जुड़े अनियमित मामलों के प्रमाण हैं, तो वह संबंधित नाम, पते और दस्तावेजों के साथ उन्हें सार्वजनिक करे। वहीं, इस पूरे मुद्दे पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया और आधिकारिक निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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