Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी कई पारंपरिक रीति-रिवाज और खान-पान की परंपराएं भी हैं। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश में तीज के मौके पर घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इनमें गुजिया, जिसे बिहार में पिड़ुकिया या पेडुकिया भी कहा जाता है, खास जगह रखती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि तीज पर गुजिया ही क्यों बनाई जाती है? क्या इसका संबंध माता पार्वती और भगवान शिव की कथा से है या फिर इसके पीछे कोई अलग क्षेत्रीय परंपरा है? आइए जानते हैं तीज पर गुजिया बनाने की असली वजह, इसकी मान्यता और घर पर बनाने की आसान विधि।
तीज पर गुजिया क्यों बनाई जाती है?
हरतालिका तीज की धार्मिक कथा का मुख्य संबंध माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए की गई तपस्या से है। इसलिए तीज की मूल धार्मिक कथा में गुजिया को किसी अनिवार्य व्यंजन के रूप में नहीं बताया गया है।
हालांकि, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तीज के अवसर पर गुजिया यानी पिड़ुकिया बनाने की पुरानी घरेलू परंपरा है। बिहार में इसे कई जगह पिड़ुकिया या पेडुकिया के नाम से जाना जाता है। तीज के दौरान इसे घर में तैयार कर पूजा में प्रसाद के रूप में अर्पित करने की परंपरा का भी उल्लेख मिलता है।
यानी तीज पर गुजिया बनाने की वजह को किसी एक अखिल भारतीय धार्मिक नियम के बजाय क्षेत्रीय लोकपरंपरा और त्योहार से जुड़े पारंपरिक खान-पान के रूप में समझना ज्यादा सही है।
बिहार में तीज की गुजिया को पिड़ुकिया क्यों कहा जाता है?
बिहार में गुजिया का एक लोकप्रिय नाम पिड़ुकिया या पेडुकिया है। तीज के आसपास बिहार के घरों में इसे तैयार करने की परंपरा आज भी देखने को मिलती है।
पुराने समय में त्योहारों की तैयारी केवल बाजार से मिठाई खरीदने तक सीमित नहीं थी। घर की महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य मिलकर त्योहार के लिए मिठाइयां और पकवान तैयार करते थे। पिड़ुकिया भी इसी घरेलू पाक परंपरा का हिस्सा बनी। बिहार में पिड़ुकिया को तीज के प्रसाद से जुड़ी पुरानी परंपरा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसे घर में परिवार के लोग मिलकर तैयार करते हैं और पूजा में अर्पित किया जाता है।
क्या तीज पर गुजिया बनाना धार्मिक रूप से जरूरी है?
हरतालिका तीज पर गुजिया बनाना पूरे भारत में अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं है। तीज पर अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। गुजिया के अलावा खीर, मालपुआ, ठेकुआ, नारियल के लड्डू, पूरी और अन्य मिठाइयां भी बनाई या भोग में शामिल की जाती हैं।
इसलिए यह कहना ज्यादा सही होगा कि बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में गुजिया/पिड़ुकिया तीज की खास पारंपरिक मिठाई है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में तीज के खान-पान की परंपराएं अलग हो सकती हैं।
तीज की गुजिया का धार्मिक महत्व क्या है?
तीज में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। व्रत के दौरान महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
पूजा में फल, मिठाई और अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। कई जगह गुजिया भी इसी पारंपरिक भोग का हिस्सा होती है। व्रत पूरा होने के बाद परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के बीच प्रसाद या मिठाई बांटने की परंपरा त्योहार की सामूहिक खुशी को बढ़ाती है। इसलिए गुजिया का महत्व मुख्य रूप से त्योहार की घरेलू और क्षेत्रीय खाद्य परंपरा से जुड़ा हुआ दिखाई देता है, न कि तीज की मूल कथा में किसी विशेष खाद्य पदार्थ के रूप में।
तीज पर गुजिया बनाने की परंपरा कैसे बनी?
इसके पीछे सबसे अहम भूमिका भारतीय त्योहारों की घर में मिठाई और पकवान बनाने की संस्कृति की रही है। त्योहारों के मौके पर परिवार के लोग एक साथ मिलकर पकवान बनाते रहे हैं। तीज भी ऐसा ही अवसर है, जब महिलाएं पूजा की तैयारियों के साथ घर में पारंपरिक मिठाइयां तैयार करती हैं।
बिहार में तीज के अवसर पर पिड़ुकिया की खुशबू और इसकी तैयारी त्योहार के माहौल का हिस्सा बन चुकी है। 2024 की पटना की एक स्थानीय रिपोर्ट में भी तीज से पहले बाजारों में पिड़ुकिया की मांग और घरों में इसकी तैयारी का उल्लेख किया गया था।
तीज पर गुजिया में क्या भरा जाता है?
परंपरागत गुजिया या पिड़ुकिया की भरावन क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती है। आमतौर पर इसमें मावा/खोया, चीनी, नारियल, सूखे मेवे और इलायची जैसी सामग्री इस्तेमाल की जाती है।
कुछ पारंपरिक तरीकों में सूजी या अन्य सामग्री भी भरावन में शामिल की जाती है। बिहार की पिड़ुकिया की रेसिपी भी परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
घर पर ऐसे बनाएं तीज की स्वादिष्ट गुजिया
अगर आप इस हरतालिका तीज पर घर में पारंपरिक गुजिया या पिड़ुकिया बनाना चाहती हैं, तो इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है।
गुजिया बनाने के लिए सामग्री
बाहरी परत के लिए:
- 2 कप मैदा
- 3-4 बड़े चम्मच घी
- जरूरत के अनुसार पानी
भरावन के लिए:
- 1 कप मावा/खोया
- आधा कप पिसी चीनी
- 2-3 बड़े चम्मच कद्दूकस किया हुआ नारियल
- कटे हुए काजू और बादाम
- किशमिश
- आधा चम्मच इलायची पाउडर
तलने के लिए:
- जरूरत के अनुसार घी या तेल
गुजिया बनाने की आसान विधि
1. सबसे पहले आटा गूंथें
एक बड़े बर्तन में मैदा लें और उसमें घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें। आटे को ढककर करीब 15-20 मिनट के लिए रख दें।
2. गुजिया की भरावन तैयार करें
कड़ाही गर्म करके उसमें मावा डालें और धीमी आंच पर हल्का भूनें। मावा ठंडा होने के बाद इसमें पिसी चीनी, नारियल, काजू, बादाम, किशमिश और इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
3. गुजिया में भरावन भरें
आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें पतली पूरी के आकार में बेल लें। अब इसके बीच में तैयार भरावन रखें। किनारों पर हल्का पानी लगाकर गुजिया को मोड़ें और किनारों को अच्छी तरह दबाकर बंद कर दें।
4. धीमी आंच पर तलें
कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। तेल बहुत ज्यादा तेज गर्म न हो, इसका ध्यान रखें। अब गुजिया को डालकर धीमी से मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें।
5. तैयार है तीज की गुजिया
सुनहरी गुजिया को कड़ाही से निकालकर प्लेट में रखें और अतिरिक्त तेल या घी निकलने दें। ठंडा होने के बाद इसे पूजा के भोग में शामिल किया जा सकता है या परिवार के साथ परोसा जा सकता है।
तीज पर गुजिया के अलावा क्या बनाया जाता है?
तीज के अवसर पर सिर्फ गुजिया ही नहीं बनाई जाती। अलग-अलग राज्यों और परिवारों में अलग-अलग पकवानों की परंपरा है। इनमें खीर, मालपुआ, ठेकुआ, नारियल के लड्डू, हलवा, पूरी और अन्य पारंपरिक मिठाइयां शामिल हो सकती हैं।
यही वजह है कि तीज का खान-पान भारत की क्षेत्रीय विविधता को भी दिखाता है।
तीज की गुजिया सिर्फ मिठाई नहीं, पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है
आज बाजार में हर तरह की मिठाइयां आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन त्योहार के मौके पर घर में गुजिया या पिड़ुकिया बनाने की परंपरा अब भी कई परिवारों में कायम है।
इसमें सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि परिवार के लोगों का साथ बैठना, पुरानी रेसिपी को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना और पूजा के लिए घर में पकवान तैयार करना भी शामिल है। खासकर बिहार में तीज के साथ पिड़ुकिया की यह परंपरा त्योहार की स्थानीय पहचान का हिस्सा बन चुकी है। पटना में भी तीज के दौरान गुजिया और अन्य पारंपरिक मिठाइयों की तैयारी को लेकर ऐसी परंपरा आज भी देखने को मिलती है।
डिस्क्लेमर: तीज से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, पूजा-पद्धति और खान-पान की परंपराएं क्षेत्र, परिवार और समुदाय के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। यह लेख उपलब्ध सामान्य और क्षेत्रीय स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









