Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के फैसले के बाद कांग्रेस ने प्रतिक्रिया दी है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार को ज्ञापन देकर पुनरीक्षण की अवधि एक महीने बढ़ाने की मांग की गई थी। अब चुनाव आयोग ने दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अवधि 15 दिन बढ़ाने का फैसला लिया है।
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव लालकिशोर नाथ शाहदेव और सूर्यकांत शुक्ला ने आयोग के इस फैसले का स्वागत किया है। दोनों नेताओं ने कहा कि जिन लोगों के नाम या दावे किसी कारण से अब तक प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाए हैं, उन्हें बढ़ी हुई अवधि का लाभ उठाना चाहिए।
एक महीने की अवधि बढ़ाने की थी मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी ने विशेष गहन पुनरीक्षण की अवधि एक महीने बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन आयोग ने फिलहाल दावा और आपत्ति की समयसीमा 15 दिन बढ़ाई है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि मतदाता सूची या एएसडीडीओ सूची में किसी तरह की कमी या त्रुटि नजर आती है तो निर्धारित अवधि के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।
फॉर्म-7 के आंकड़ों पर कांग्रेस ने मांगी जानकारी
कांग्रेस नेताओं ने फॉर्म-7 को लेकर भी चुनाव आयोग से अधिक पारदर्शिता की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयोग ने फॉर्म-7 के तहत प्राप्त कुल आवेदनों की संख्या सार्वजनिक की है, लेकिन यह जानकारी भी सामने आनी चाहिए कि किस राजनीतिक दल ने कितनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
कांग्रेस का कहना है कि यह जानकारी सार्वजनिक होने से पूरी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी।
18 साल की उम्र पूरी करने वाले युवाओं के नाम जोड़ने पर जोर
कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची में नए युवा मतदाताओं के नाम जोड़ने को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके या 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष के होने वाले युवाओं के नाम जोड़ने के लिए अब तक करीब साढ़े चार लाख आवेदन मिले हैं, जबकि पार्टी का अनुमान है कि पात्र युवाओं की संख्या इससे काफी अधिक हो सकती है।
कांग्रेस ने कहा कि कोई भी पात्र युवा मताधिकार से वंचित न रहे, इसके लिए फॉर्म-6 जमा करने की समयसीमा बढ़ाना जरूरी है।
फॉर्म-7 पर फैसला लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनने की मांग
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि फॉर्म-7 के तहत मतदाता का नाम हटाने से संबंधित किसी भी आवेदन पर अंतिम निर्णय लेने से पहले पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आवेदन करने वाले व्यक्ति और जिस मतदाता का नाम हटाने का प्रस्ताव है, दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर उनका पक्ष सुना जाना चाहिए। इसके बाद ही किसी नाम को हटाने पर फैसला किया जाए।
कांग्रेस ने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित सुनवाई जरूरी है, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से सूची से बाहर न हो।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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