Ranchi: झारखंड में राज्य सूचना आयोग के कामकाज को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति अब तक लंबित रहने और आयोग में अपीलों व शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू नहीं होने का मुद्दा उठाया है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री से मुख्य सूचना आयुक्त के चयन के लिए संबंधित समिति की बैठक जल्द बुलाने, नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराने और राज्य सूचना आयोग को पूरी तरह कार्यशील बनाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समयसीमा बताने को भी कहा है।
जुलाई 2026 में चार नए सूचना आयुक्तों ने शपथ ली थी
पत्र में मरांडी ने उस बैठक का भी उल्लेख किया, जिसमें मुख्यमंत्री के साथ वह और मंत्री हफीजुल हसन मौजूद थे। उनके अनुसार, उस बैठक में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मरांडी ने कहा कि इसी भरोसे पर उन्होंने नियुक्ति संबंधी अनुशंसा पर अपनी सहमति और हस्ताक्षर किए थे।
मरांडी ने सवाल उठाया कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद भी मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति लंबित रहने से उन नागरिकों को इसका लाभ कैसे मिलेगा, जो अपनी अपील और शिकायतों पर सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि राज्य सूचना आयोग में चार नए सूचना आयुक्तों-अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक ने जुलाई 2026 में शपथ ली थी।
सुनवाई में देरी से सूचना पाने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है
मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति को लेकर मामला पहले न्यायिक स्तर पर भी उठ चुका है। झारखंड हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के आदेश में दर्ज है कि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति हो चुकी थी, लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति तब तक अंतिम नहीं हुई थी।
मरांडी ने कहा कि सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी कामकाज से जुड़ी जानकारी मांगने का कानूनी अधिकार देता है। ऐसे में आयोग में सुनवाई में देरी से सूचना पाने का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।

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