नई दिल्ली: Chief Election Commissioner (CEC) Gyanesh Kumar को लेकर चल रहा विवाद अब सिर्फ Special Intensive Revision यानी SIR, वोटर लिस्ट और Election Commission की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है। 25 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ Supreme Court में एक नई PIL दाखिल हुई है, जिसमें कथित एकतरफा फैसलों की जांच, SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोपों की जांच और SIT/न्यायिक जांच जैसी मांगें की गई हैं। दूसरी तरफ विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में Gyanesh Kumar को हटाने के लिए नए प्रस्ताव की तैयारी कर रहे हैं।
लेकिन इन घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है—क्या Gyanesh Kumar को CEC के पद से हटाना इतना आसान है?
जवाब है—नहीं।
CEC का पद सामान्य सरकारी पद नहीं है। संविधान ने इस पद को विशेष सुरक्षा दी है। इसलिए किसी राजनीतिक दल की मांग, संसद में प्रस्ताव की घोषणा या Supreme Court में PIL दाखिल हो जाना अपने-आप में CEC को पद से हटाने के लिए पर्याप्त नहीं है। संविधान और कानून में इसके लिए अलग और कठिन प्रक्रिया तय है।
सबसे पहले समझिए—Gyanesh Kumar अभी कहां खड़े हैं?
Gyanesh Kumar ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें Chief Election Commissioner के रूप में पदभार संभाला था। Election Commission की आधिकारिक वेबसाइट पर वह अभी भी CEC के रूप में सूचीबद्ध हैं। उनके साथ Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi Commission के सदस्य हैं।
यानी मौजूदा स्थिति में:
Gyanesh Kumar CEC हैं → पद पर बने हुए हैं → उनके खिलाफ removal की मांग/प्रक्रिया की खबर है → लेकिन उनका removal नहीं हुआ है।
आज Supreme Court में क्या हुआ?
25 सितंबर को अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से Supreme Court में PIL दाखिल की गई। इसमें Gyanesh Kumar के अलावा Senior Deputy Election Commissioner Maneesh Garg और ECI की IT अधिकारी Seema Khanna के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कुछ फैसले बाकी Election Commissioners की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि कथित तौर पर बिना बहुमत की सहमति लिए गए फैसलों, guidelines, directives और software modifications को अवैध घोषित किया जाए। साथ ही SIR के दौरान करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोप की जांच कराने की मांग भी की गई है।
याचिका में आगे:
- SIT या judicial inquiry की मांग,
- मूल Form 6 को बहाल करने की मांग,
- कथित statutory violations की जांच,
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई/prosecution
जैसी राहतें मांगी गई हैं।
लेकिन एक बात बिल्कुल साफ रखें
Supreme Court ने अभी Gyanesh Kumar को दोषी नहीं ठहराया है। और उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार आज Supreme Court ने कोई SIT गठित करने का आदेश भी नहीं दिया है। अभी यह एक दाखिल की गई PIL और उसमें मांगी गई राहतों का मामला है।
फिर Gyanesh Kumar को हटाने की मांग क्यों उठी?
इसके पीछे पिछले दिनों सामने आई Election Commission की अंदरूनी कार्यप्रणाली से जुड़ी रिपोर्ट सबसे बड़ा कारण बनी है।
The Indian Express की 23 सितंबर की investigation के अनुसार, Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu और Vivek Joshi ने लगभग 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में SIR, नए मतदाताओं के registration, electoral-roll data और IT systems से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ आपत्तियों में Form 6 में बदलाव और electoral-roll database तक access को लेकर सवाल उठाए गए थे। यहीं से विवाद ने नया रूप लिया।
क्या ECI के दो Commissioners ने Gyanesh Kumar का विरोध किया?
रिपोर्ट के अनुसार, Sandhu और Joshi ने कई फैसलों पर objections दर्ज किए। लेकिन इसे सीधे “दो Commissioners ने CEC को हटाने की मांग कर दी” कहना सही नहीं होगा। Reported objections और removal demand दो अलग चीजें हैं।
ECI की तरफ से बाद में यह कहा गया कि multi-member constitutional body में deliberation के दौरान अलग-अलग views आना सामान्य है और final decisions Commission द्वारा unanimously लिए गए।
इसलिए इस मामले में दो बातें साथ-साथ मौजूद हैं:
- रिपोर्टेड तथ्य: दो Election Commissioners ने कई मुद्दों पर objections दर्ज किए।
- ECI का पक्ष: ये deliberative process का हिस्सा थे और final institutional decisions unanimous थे।
अब आता है सबसे बड़ा सवाल—CEC को हटाने का रास्ता क्या है?
यहीं से पूरा “संवैधानिक खेल” समझना जरूरी है।
भारत के संविधान का Article 324(5) कहता है कि Chief Election Commissioner को उसके पद से केवल उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह Supreme Court के Judge को हटाया जाता है।
2023 के Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act की Section 11 भी यही व्यवस्था दोहराती है। इसमें साफ कहा गया है कि CEC को Supreme Court Judge जैसी प्रक्रिया और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है। उसी कानून के अनुसार अन्य Election Commissioners को CEC की recommendation के बिना हटाया नहीं जा सकता।
इसका मतलब है कि: CEC को हटाने का अधिकार किसी एक मंत्री, प्रधानमंत्री या Election Commission के किसी दूसरे सदस्य के पास नहीं है।
CEC को हटाने के लिए कौन-सी प्रक्रिया शुरू करनी होगी?
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए:
Step 1 — Parliament में Removal Motion का Notice
सबसे पहले संसद में CEC को हटाने के लिए motion का notice दिया जाता है। Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत ऐसे notice पर Lok Sabha में कम-से-कम 100 MPs या Rajya Sabha में कम-से-कम 50 MPs के हस्ताक्षर होने चाहिए। लेकिन यहां भी सिर्फ 100 या 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने से CEC नहीं हटते।
Step 2 — Speaker/Chairman का फैसला
Notice मिलने के बाद Lok Sabha Speaker या Rajya Sabha Chairman यह तय कर सकते हैं कि motion को admit किया जाए या नहीं। Judges (Inquiry) Act की Section 3 में Speaker/Chairman को motion admit या refuse करने की शक्ति दी गई है। यही चरण बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि notice देना और motion का formally admit होना दो अलग चीजें हैं।
Gyanesh Kumar के मामले में यह पहले भी हो चुका है
यह पहली बार नहीं है जब Gyanesh Kumar के removal की मांग Parliament तक पहुंची हो। Lok Sabha के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, 12 मार्च 2026 को 130 सांसदों के हस्ताक्षर वाला removal motion notice Speaker को दिया गया था। लेकिन Speaker ने Judges (Inquiry) Act के तहत उस notice को admit करने से इनकार कर दिया था।
यानी इतिहास यह दिखाता है: 130 signatures → notice submitted → लेकिन removal process आगे नहीं बढ़ी। अब सितंबर 2026 में Opposition fresh motion की तैयारी कर रहा है।
Step 3 — अगर Motion Admit हो गया तो?
यहीं से मामला गंभीर constitutional inquiry में बदलता है। अगर motion admit होता है तो inquiry committee गठित की जाती है। Judges (Inquiry) Act के तहत committee में तीन सदस्य होते हैं: Supreme Court का एक Judge/Chief Justice, High Court का एक Chief Justice, और एक distinguished jurist। यह committee आरोपों की जांच करती है।
Step 4 — आरोपों की जांच होगी
Committee आरोपों को तय करेगी और संबंधित व्यक्ति को अपना defence रखने का उचित अवसर देना होगा। कानून के अनुसार committee evidence ले सकती है, documents मंगा सकती है और witnesses को बुला सकती है। उसे civil court जैसी कुछ powers भी प्राप्त होती हैं। इसके बाद committee अपनी report Parliament के संबंधित सदन/सदनों के सामने रखती है।
Step 5 — तभी Parliament में असली Removal Motion आता है
अगर inquiry committee यह पाती है कि आरोप साबित नहीं हुए, तो प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। अगर committee misbehaviour या incapacity के आधार पर removal को justify करने वाली finding देती है, तभी Parliament में आगे का संवैधानिक चरण आता है। यानी केवल Opposition के आरोपों या PIL से CEC को हटाया नहीं जा सकता।
Step 6 — दोनों सदनों में Special Majority
यह सबसे कठिन चरणों में से एक है। Supreme Court Judge के removal की तरह CEC के removal के लिए भी Parliament के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। इसमें House की total membership का majority और present and voting members में कम-से-कम 2/3 majority की आवश्यकता होती है। इसके बाद Parliament President को removal के लिए address प्रस्तुत करता है।
Step 7 — President की भूमिका
Parliament की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद President के समक्ष address जाता है। इसके बाद removal का अंतिम constitutional step पूरा होता है।
तो क्या सिर्फ Supreme Court Gyanesh Kumar को हटा सकता है?
Supreme Court में दाखिल वर्तमान PIL में कार्रवाई, जांच और कथित निर्णयों को चुनौती जैसी मांगें हैं। लेकिन CEC के constitutional removal की अलग व्यवस्था Article 324(5) में है। इसलिए Supreme Court में PIL दाखिल होना अपने-आप में parliamentary removal प्रक्रिया का विकल्प नहीं बन जाता। Court proceedings और parliamentary removal process दो अलग institutional tracks हैं।
क्या Opposition के पास सिर्फ राजनीतिक दबाव का रास्ता है?
फिलहाल कम-से-कम तीन अलग रास्ते दिखाई दे रहे हैं:
- अदालत: Supreme Court में PIL और विभिन्न courts में SIR से जुड़ी चुनौतियां।
- Parliament: CEC के removal के लिए प्रस्ताव/notice की तैयारी।
- Public/Political mobilisation: Congress और अन्य राजनीतिक समूहों के प्रदर्शन और सार्वजनिक मांगें।
25 सितंबर को Congress ने कई राज्यों में Gyanesh Kumar के खिलाफ प्रदर्शन आयोजित किए। कुछ जगह पुलिस कार्रवाई और हिरासत की भी रिपोर्ट आई है। लेकिन इनमें से किसी राजनीतिक प्रदर्शन का मतलब यह नहीं है कि removal की constitutional threshold पूरी हो गई।
SIR और 13 करोड़ का मुद्दा कितना अहम है?
नई Supreme Court PIL में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोप की जांच की मांग की गई है। लेकिन खबर में यहां सबसे ज्यादा सावधानी जरूरी है। “13 करोड़ नाम हटाए गए” एक reported/petition claim है, जबकि “13 करोड़ पात्र मतदाताओं को अवैध रूप से हटाया गया” एक अलग और बड़ा निष्कर्ष है, जिसे अभी किसी अदालत के अंतिम फैसले के रूप में नहीं लिखा जा सकता।
Form 6 भी क्यों बना बड़ा मुद्दा?
Form 6 नए मतदाता के registration से जुड़ा statutory application है। The Indian Express ने रिपोर्ट किया कि इस साल online Form 6 में SIR से संबंधित एक नया declaration सामने आया, जिसमें आवेदक से पुराने SIR electoral roll में अपने या माता-पिता/दादा-दादी के नाम से जुड़ी जानकारी मांगी गई। रिपोर्ट के मुताबिक Sandhu और Joshi ने इसकी वैधानिकता और प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। ECI ने इस interpretation का विरोध करते हुए कहा है कि statutory Form 6 को बदला नहीं गया, बल्कि SIR के तहत declaration जोड़ा गया था।
ECINET का सवाल भी इसी विवाद से जुड़ता है
Internal objections की रिपोर्ट में electoral-roll data और IT systems को लेकर भी सवाल सामने आए। The Indian Express के अनुसार, दोनों Election Commissioners ने electoral-roll database तक access और उसके संभावित centralisation को लेकर चिंता जताई थी। यहां मूल प्रश्न यह है कि voter-roll में अंतिम statutory authority किसके पास रहती है और digital system उस प्रक्रिया को किस तरह support करता है।
क्या अभी Gyanesh Kumar की कुर्सी जा सकती है?
कानूनी रूप से रास्ता मौजूद है, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम अपने-आप removal तक नहीं पहुंचता। आज की स्थिति को तीन स्तरों में समझिए:
अभी क्या हो चुका है?
- Supreme Court में PIL दाखिल।
- SIR से जुड़े आरोपों की जांच की मांग।
- Opposition की ओर से fresh removal motion की तैयारी।
- Congress के nationwide protests।
- ECI के भीतर reported objections पर विवाद।
अभी क्या नहीं हुआ है?
- Gyanesh Kumar ने इस्तीफा नहीं दिया है।
- उन्हें पद से हटाया नहीं गया है।
- Supreme Court ने उन्हें दोषी घोषित नहीं किया है।
- Supreme Court ने वर्तमान PIL पर SIT का आदेश नहीं दिया है।
- Parliament ने अभी उन्हें हटाने का address पास नहीं किया है।
अब सबसे ज्यादा नजर किस पर रहेगी?
- 🔴 Supreme Court: नई PIL का आगे क्या procedural development होता है?
- 🔴 Parliament: क्या Opposition दोनों सदनों में fresh notice वास्तव में submit करता है?
- 🔴 Speaker/Chairman: अगर notice आता है तो क्या वह admit होता है?
- 🔴 Inquiry Committee: अगर motion admit हुआ तो जांच किस तरह आगे बढ़ती है?
- 🔴 Election Commission: Form 6, ECINET और internal objections पर क्या और दस्तावेज सामने आते हैं?
Gyanesh Kumar Removal: पूरा संवैधानिक रास्ता एक नजर में
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Parliament में Removal Motion का Notice
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100 Lok Sabha / 50 Rajya Sabha MPs के signatures
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Speaker/Chairman का admission या rejection
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Motion admit होने पर 3-member Inquiry Committee
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आरोपों की जांच + defence का अवसर
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Committee Report
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अगर misbehaviour/incapacity साबित हो
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दोनों सदनों में Special Majority
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President को Address
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CEC का Removal
एक नजर में पूरा मामला
| सवाल | मौजूदा स्थिति |
|---|---|
| Gyanesh Kumar CEC हैं? | हां |
| Supreme Court में PIL? | हां, 25 सितंबर को दाखिल |
| SIT का आदेश? | नहीं; PIL में मांग की गई है |
| 13 करोड़ का मामला? | याचिका में जांच की मांग/आरोप |
| 14 internal objections? | The Indian Express ने रिपोर्ट किया |
| ECI का जवाब? | Final decisions unanimous होने का पक्ष |
| Parliament removal motion? | विपक्ष की ओर से तैयारी की खबर |
| पहले removal notice हुआ था? | हां, मार्च 2026 में 130 MPs का notice; Speaker ने admit नहीं किया |
| Gyanesh Kumar हटे? | नहीं |
| इस्तीफा दिया? | नहीं |
| Court ने दोषी माना? | नहीं |
निष्कर्ष: असली “संवैधानिक खेल” क्या है?
Gyanesh Kumar के खिलाफ मौजूदा विवाद को सिर्फ “CEC पर विपक्ष का हमला” या सिर्फ “SIR विवाद” मानना अधूरा होगा। आज मामला तीन अलग संस्थागत रास्तों पर चल रहा है: Court, Election Commission, और Parliament। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CEC की कुर्सी को संविधान ने जानबूझकर मजबूत सुरक्षा दी है। इसलिए Supreme Court में PIL, राजनीतिक विरोध या Parliament में notice—इनमें से कोई भी अकेले Gyanesh Kumar को पद से नहीं हटाता। Removal के लिए एक निर्धारित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
फिलहाल Gyanesh Kumar CEC पद पर बने हुए हैं और विवाद का अगला बड़ा पड़ाव इस बात पर निर्भर करेगा कि Supreme Court में दाखिल PIL, Parliament में प्रस्ताव की कोशिश और Election Commission के भीतर उठे सवाल आगे किस दिशा में जाते हैं।

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