नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगी है। दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब श्रेणी में पहुंचने के बीच प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में 1 नवंबर से लागू होने वाले प्रतिबंधों को लेकर वाहन चालकों, नौकरीपेशा लोगों और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव सामने आ सकते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में बिना वैध PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन देने पर रोक, दूसरे राज्यों से आने वाले प्रदूषणकारी वाहनों पर प्रतिबंध, पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी और कार्यालयों में वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। हालांकि, सभी उपायों का 1 नवंबर से एक साथ लागू होना आधिकारिक आदेशों और प्रदूषण की स्थिति पर निर्भर करेगा।
बिना PUC सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा ईंधन?
प्रदूषण नियंत्रण के तहत ‘नो PUC, नो फ्यूल’ व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की बात सामने आई है। इसके तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं रखने वाले वाहन चालकों को पेट्रोल, डीजल, CNG या LPG देने से रोका जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान करना और वाहन मालिकों को नियमित प्रदूषण जांच के लिए प्रोत्साहित करना है।
दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों पर सख्ती
दिल्ली में बाहरी राज्यों में पंजीकृत प्रदूषणकारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की योजना भी चर्चा में है। इसके तहत नॉन-BS-VI श्रेणी के कुछ वाहनों, विशेष रूप से व्यावसायिक वाहनों, पर पाबंदियां लगाई जा सकती हैं।
हालांकि, प्रतिबंध किन वाहन श्रेणियों पर लागू होंगे और किन्हें छूट मिलेगी, यह संबंधित आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होगा।
पार्किंग शुल्क बढ़ाने की तैयारी
दिल्ली में निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के उद्देश्य से पार्किंग शुल्क दोगुना करने का उपाय भी प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य लोगों को सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है।
दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम?
वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों में सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था भी शामिल हो सकती है।
इससे सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसे 1 नवंबर से सभी कार्यालयों के लिए अनिवार्य मानना अभी उचित नहीं होगा। ऐसी व्यवस्था लागू करने के लिए संबंधित प्राधिकरण का आदेश जरूरी है।
निर्माण कार्यों पर बढ़ेगी निगरानी
राजधानी में निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल को प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। ऐसे में निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों को सख्ती से लागू करने और प्रदूषण बढ़ने पर कुछ गतिविधियों पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है।
एंटी-स्मॉग गन और ड्रोन से निगरानी
बड़ी व्यावसायिक इमारतों, मॉल, होटलों और निर्माण स्थलों पर एंटी-स्मॉग गन तथा मिस्ट सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर भी सख्ती बढ़ाई जा सकती है।
इसके अलावा खुले में कचरा, पत्तियां और अन्य सामग्री जलाने की घटनाओं पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना और अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी दफ्तरों के समय में भी बदलाव संभव
सड़कों पर एक ही समय में वाहनों की भीड़ कम करने के लिए सरकारी कार्यालयों के कामकाज के समय में बदलाव भी एक संभावित उपाय है। निजी संस्थानों को कारपूलिंग, सार्वजनिक परिवहन और अलग-अलग शिफ्ट में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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