Dhanteras 2026 Shubh Muhurat: धनतेरस का पर्व आज, 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में पूजा और खरीदारी करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। पंचांग के अनुसार, खरीदारी के लिए शाम 5:45 बजे से 7:42 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। वहीं, यम दीपक जलाने का शुभ समय, प्रदोष काल और इस दिन बनने वाले विशेष ज्योतिषीय योगों के बारे में भी जानना जरूरी है।
Dhanteras 2026: धनतेरस पर पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। दिवाली से पहले मनाए जाने वाले इस पर्व पर धन, आरोग्य और समृद्धि की कामना की जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करने की परंपरा है।
बताए गए पंचांग के अनुसार, 6 नवंबर को शाम 5:49 बजे से रात 8:23 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति की कामना करते हैं।
Dhanteras Shopping Muhurat 2026: खरीदारी का शुभ समय
धनतेरस के अवसर पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य धातुओं की वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में खरीदारी करने से घर में बरकत और समृद्धि आती है।
पंचांग के अनुसार, धनतेरस पर खरीदारी के लिए शाम 5:45 बजे से 7:42 बजे तक वृषभ लग्न का शुभ समय बताया गया है। वृषभ लग्न को स्थिर लग्न माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में खरीदी गई वस्तुएं सुख-समृद्धि और धन की स्थिरता का प्रतीक मानी जाती हैं। हालांकि, खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है।
Dhanteras Yam Deepam 2026: यम दीपक कब और कितने बजे जलाएं?
धनतेरस पर यम दीपदान का विशेष महत्व है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस दिन मृत्यु के देवता यमराज के नाम से दीपक जलाया जाता है। मान्यता है कि यम दीपक जलाने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और लंबी आयु की कामना की जाती है।
बताए गए समय के अनुसार, 6 नवंबर को शाम 5:32 बजे से 6:51 बजे तक यम दीपक जलाने का शुभ समय है। श्रद्धालु प्रदोष काल में भी अपनी स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार दीपदान कर सकते हैं। यम दीपक जलाते समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है।
Dhanteras 2026 Shubh Yog: धनतेरस पर बन रहे हैं ये शुभ योग
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस पर कई शुभ योगों का संयोग बताया जा रहा है। शुक्रवार को प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि पड़ने के कारण शुक्र प्रदोष योग का उल्लेख किया गया है। इसे धन, सुख और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
इसके अलावा, बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मीनारायण राजयोग तथा मालव्य राजयोग का भी उल्लेख किया जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, ऐसे योगों में पूजा-पाठ और शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है। हालांकि, इन योगों की सटीक स्थिति की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग और ग्रहों की वास्तविक स्थिति का मिलान करना उचित होगा।
Dhanteras Tradition: धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदना क्यों माना जाता है शुभ?
धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल और अन्य धातुओं से बनी वस्तुएं खरीदने की पुरानी परंपरा है। इस दिन लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार आभूषण, बर्तन, सिक्के और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस को आरोग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
इस दिन सोना-चांदी खरीदने के अलावा खड़ा धनिया, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाएं खरीदना भी शुभ माना जाता है। कई घरों में धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा भी है, जिसे साफ-सफाई, बरकत और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना चाहिए?
धनतेरस पर लोग अपनी आस्था, जरूरत और बजट के अनुसार कई तरह की वस्तुएं खरीदते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- सोना और चांदी: आभूषण, सिक्के और अन्य वस्तुएं।
- बर्तन: पीतल, तांबे, स्टील और अन्य धातुओं के बर्तन।
- धनिया: खड़ा धनिया खरीदने की पारंपरिक मान्यता है।
- लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं: दिवाली की पूजा के लिए।
- झाड़ू: घर की स्वच्छता और बरकत का प्रतीक।
- वाहन और घरेलू सामान: लोग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करते हैं।
ध्यान रखें कि ये धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। खरीदारी का निर्णय अपनी आर्थिक स्थिति और वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
धनतेरस 2026: पूजा और खरीदारी से जुड़ी जरूरी बातें
धनतेरस पर पूजा करने से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। शाम को शुभ समय के अनुसार भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करें। दीपक जलाएं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें।
यम दीपदान के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग का पालन करें। पूजा और खरीदारी के मुहूर्त अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए अपने शहर के पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दिए गए मुहूर्त और ज्योतिषीय योग उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। स्थान के अनुसार पंचांग और शुभ समय में अंतर हो सकता है। सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषाचार्य से पुष्टि करें।
कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









