Bihar: वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर अजीत अंजुम के खिलाफ बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड में एफआईआर दर्ज की गई है। मामला उनके उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भेदभाव पर सवाल उठाए थे।
FIR में आरोप लगाया गया है कि उनकी रिपोर्टिंग ने “सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया और सरकारी कार्य में बाधा डाली।” यह शिकायत एक मुस्लिम बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की ओर से दर्ज कराई गई है, जो अजीत अंजुम के वीडियो में शामिल थे।
क्या है मामला?
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है। इसका मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना, मृत लोगों के नाम हटाना और दोहरी प्रविष्टियों को समाप्त करना है।
अजीत अंजुम ने बलिया प्रखंड में SIR प्रक्रिया पर 40 मिनट का एक वीडियो प्रकाशित किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और कुछ समुदायों को निशाना बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि BLO द्वारा दस्तावेज़ मांगने की प्रक्रिया अस्पष्ट और लोगों के लिए भ्रमित करने वाली है।
FIR में क्या आरोप लगाए गए?
- सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास
- सरकारी कामकाज में बाधा डालना
- BLO को “वीडियो में जबरन शामिल करने” का आरोप
अजीत अंजुम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “मैंने जो सवाल पूछे, वह एक पत्रकार के कर्तव्य का हिस्सा हैं। मैंने कोई ऐसा बयान नहीं दिया जिससे सांप्रदायिक तनाव फैले।”
बेगूसराय में दर्ज ये FIR एक पत्रकार के तौर पर मेरे लिए सर्टिफिकेट की तरह है . चुनाव आयोग के ‘ SIR ‘ पर खुलासे का ये अंजाम तो होना ही था .
इसी पोस्ट के कॉमेंट बॉक्स में मेरा वीडियो है . उस वीडियो में चुनाव आयोग की को खामियां दिख रही हैं , उनका जवाब देने की बजाय मुझ पर FIR कर दी… pic.twitter.com/agQsr5tivG— Ajit Anjum (@ajitanjum) July 14, 2025
अजीत अंजुम का पक्ष: “FIR एक सम्मान पत्र”
अजीत अंजुम ने FIR को अपनी पत्रकारिता का सम्मान बताते हुए कहा:
“बेगूसराय में दर्ज ये FIR मेरे लिए एक सर्टिफिकेट है। SIR पर खुलासों का यही अंजाम होना था। प्रशासन ने BLO पर दबाव डालकर शिकायत कराई।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय प्रशासन (SDM और BDO) ने उन पर रिपोर्टिंग न करने का दबाव बनाने की कोशिश की।
सोशल मीडिया पर समर्थन
अजीत अंजुम के खिलाफ कार्रवाई के बाद मीडिया और सामाजिक कार्यकर्ताओं का बड़ा तबका उनके समर्थन में सामने आया।
- एक वरिष्ठ पत्रकार ने X (Twitter) पर लिखा,
“SIR में खामियां उजागर करना पत्रकार का कर्तव्य है। FIR प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”
- कई यूजर्स ने इसे “सच दबाने की कोशिश” बताया।
हालांकि कुछ लोग इसे “सेंसेशनलिज़्म और प्रक्रिया में हस्तक्षेप” भी मान रहे हैं।
क्या यह प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है?
इस घटना ने फिर एक बार मीडिया की आज़ादी और पत्रकारों की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है। भारतीय न्यूज़ मीडिया एथिक्स के अनुसार:
- सत्य की खोज और निष्पक्ष रिपोर्टिंग पत्रकार का अधिकार और कर्तव्य है।
- वहीं, पत्रकारों को भी यह ध्यान रखना होता है कि उनकी रिपोर्टिंग से कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल असर न पड़े।
अब आगे क्या?
FIR के बाद अजीत अंजुम ने साफ किया कि वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगे और अपनी पत्रकारिता जारी रखेंगे। उन्होंने चुनाव आयोग से भी SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की अपील की है।













