धनबाद, झारखंड: “जिनके घर शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों के घर पर पत्थर नहीं मारना चाहिए।” यह मुहावरा हाल की घटनाओं में झारखंड पुलिस पर सटीक बैठता है। गैंगस्टर Prince Khan अब राज्य में अपराध का पर्याय बन चुका है, लेकिन उसकी ताकत का रहस्य सिर्फ उसकी हिम्मत नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक और संरक्षण भी है।
वरिष्ठ अपराध पत्रकार ने बताया कि धनबाद और झारखंड के सिस्टम की कमजोरियों ने दाऊद इब्राहिम जैसे अपराधियों को भी कभी संरक्षण दिया था। “1990 के दशक में Dawood Ibrahim का ड्राइविंग लाइसेंस धनबाद से बना था। उसी दौर की लापरवाही और सिस्टम की मेहरबानी ने यह दिखाया कि अपराधियों को पनपने का अवसर मिलता है,” उन्होंने कहा।
वास्तविक घटनाओं पर नजर डालें तो 25 नवंबर 2021 को नन्हे हत्याकांड के बाद धनबाद पुलिस प्रिंस खान के पीछे पड़ी थी। उस समय ऐसा लग रहा था कि गिरफ्तारी नजदीक है, लेकिन प्रिंस खान ने पुलिस को चकमा देकर विदेश भागने का रास्ता निकाल लिया। उसने ‘हैदर अली’ के नाम से फर्जी पासपोर्ट बनवाया और सुरक्षित रूप से देश छोड़ लिया।
इस घटना ने धनबाद पुलिस की किरकिरी कर दी। बैंक मोड़ थाना में तैनात कलिका राम पर प्रिंस खान को विदेश भागने में मदद करने के आरोप लगे, लेकिन बाद में उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया। इससे सवाल उठते हैं कि क्या अंदरूनी संरक्षण मिला या सिस्टम के दबाव में किसी ने उसे बचाने की कोशिश की?
हाल ही में रांची में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां राणा राहुल सिंह को पुलिस ने बॉडीगार्ड मुहैया कराया। जब तक असलियत का पता चला, वह भी गिरफ्त से बाहर हो चुका था।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुलिस प्रशासन इन अपराधियों को संरक्षण न देती, तो ये सभी सलाखों के पीछे होते और कई ज़िंदगियां बचाई जा सकती थीं।
अब सवाल यह है कि क्या पुलिस राणा राहुल सिंह को गिरफ्तार कर पाएगी, या फिर प्रिंस खान को प्रत्यर्पित कर भारत लाने में सफल होगी।
क्योंकि जब सिस्टम अपराध में शामिल हो जाए, तो अपराधियों के मन से कानून का डर खत्म हो जाता है। ऐसे में अपराधी पैदा नहीं होते, बल्कि उन्हें संरक्षण देकर तैयार किया जाता है—और वे उसी सिस्टम के सहारे फलते-फूलते हैं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
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