नई दिल्ली/रांची: राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम में 14 से 17 जुलाई तक आयोजित भारत टेक्स 2026 (Bharat Tex 2026) में Jharkhand का पवेलियन देश-विदेश से आए उद्योग प्रतिनिधियों, खरीदारों, फैशन डिजाइनरों और निर्यातकों के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। राज्य के पारंपरिक हस्तकरघा, जनजातीय शिल्प और हाल ही में GI (Geographical Indication) टैग प्राप्त उत्पादों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पवेलियन पहुंच रहे हैं।
झारखंड सरकार का कहना है कि भारत टेक्स 2026 में राज्य की सक्रिय भागीदारी पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक बाजारों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा ‘आत्मनिर्भर झारखंड’ और ‘विकसित झारखंड’ के विजन को मजबूत करना है।
GI टैग वाले उत्पाद बने सबसे बड़ा आकर्षण
झारखंड पवेलियन में राज्य के छह प्रमुख GI टैग प्राप्त हस्तकरघा एवं वस्त्र उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें—
- तसर सिल्क
- कुचाई सिल्क
- भगैया साड़ी एवं फैब्रिक
- दुमका चादर
- भोया साड़ी एवं फैब्रिक
- पांची साड़ी एवं फैब्रिक
शामिल हैं। इन उत्पादों को आगंतुकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। खरीदार इनके पारंपरिक डिजाइन, प्राकृतिक रंगों और उत्कृष्ट गुणवत्ता की सराहना कर रहे हैं।
तसर सिल्क से लेकर पांची साड़ी तक की अलग पहचान
झारखंड का तसर सिल्क अपनी प्राकृतिक चमक, मजबूती और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया के कारण देश-विदेश में प्रसिद्ध है। वहीं कुचाई सिल्क अपनी महीन बुनाई और आकर्षक बनावट के लिए जाना जाता है।
भगैया साड़ी प्राकृतिक रंगों और हस्तनिर्मित डिजाइन की वजह से ग्रामीण शिल्प परंपरा की पहचान मानी जाती है। दूसरी ओर दुमका चादर संताल परगना की पारंपरिक बुनाई कला का प्रतीक है, जो मजबूती और पारंपरिक बॉर्डर डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध है।
इसके अलावा भोया साड़ी जनजातीय कला और रंग संयोजन का शानदार उदाहरण है, जबकि पांची साड़ी अपनी ज्यामितीय आकृतियों और आदिवासी सांस्कृतिक डिजाइनों के कारण अलग पहचान रखती है।
स्थानीय कारीगरों के लिए खुल रहे नए अवसर
राज्य सरकार के अनुसार, GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है। इससे स्थानीय बुनकरों, शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा हुए हैं। भारत टेक्स 2026 के दौरान कई खरीदारों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इन उत्पादों के निर्यात और व्यावसायिक विस्तार को लेकर भी रुचि दिखाई है।
झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को मिल रहा वैश्विक मंच
भारत टेक्स 2026 में झारखंड पवेलियन केवल उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय कला और पारंपरिक बुनाई कौशल को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से झारखंड के हस्तकरघा और हस्तशिल्प उद्योग को नई गति मिलेगी और स्थानीय कारीगरों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।







