नई दिल्ली/रांची: झारखंड के पलामू जिले से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से की गई इस नियुक्ति के बाद पलामू और चंदवा क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ब्रजमोहन राम का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे ब्रजमोहन राम ने अपनी राजनीतिक पहचान खुद बनाई और बिहार विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का सफर तय किया। वह पलामू लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद चुने गए थे, और अब उन्हें ओडिशा के राज्यपाल की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
छह राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले
सोमवार को राज्यपालों की नियुक्ति और तबादले से संबंधित फैसले में कुल छह राज्यों को लेकर बदलाव किए गए हैं:
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ब्रजमोहन राम: ओडिशा के राज्यपाल नियुक्त।
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डॉ. सुधा यादव: कर्नाटक की राज्यपाल बनाई गईं।
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डॉ. ढाल सिंह बिसेन: उत्तराखंड के राज्यपाल बनाए गए।
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दुष्यंत गौतम: सिक्किम के राज्यपाल बनाए गए।
झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्टSpecial Report -
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर: केरल के राज्यपाल से स्थानांतरित होकर तमिलनाडु भेजे गए।
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ओम प्रकाश माथुर: सिक्किम के राज्यपाल से स्थानांतरित होकर केरल के राज्यपाल बनाए गए।
इन सभी बदलावों के बीच ब्रजमोहन राम की नियुक्ति झारखंड, खासकर पलामू क्षेत्र में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है।
चंदवा के साधारण परिवार में हुआ था जन्म
ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन पलामू जिले के चंदवा में हुआ था, जो वर्तमान में लातेहार जिले के अंतर्गत आता है।
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माता-पिता: उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी है।
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उनका परिवार मूल रूप से खेती-किसानी से जुड़ा रहा है।
सामान्य पारिवारिक परिस्थितियों में पले-बढ़े ब्रजमोहन राम की रुचि शुरुआत से ही सामाजिक गतिविधियों और सार्वजनिक जीवन में रही। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी ग्रामीण समाज से जुड़ी पृष्ठभूमि ने उन्हें क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से गहराई से परिचित होने का अवसर दिया।
लोहरदगा से पूरी की स्नातक की पढ़ाई
ब्रजमोहन राम ने लोहरदगा स्थित बीएस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
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वैवाहिक जीवन: उनका विवाह 5 मार्च 1979 को लीला देवी के साथ हुआ था। उनके तीन पुत्र हैं।
शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों के साथ आगे बढ़ते हुए उन्होंने राजनीति में अपनी मजबूत जगह बनाई। धीरे-धीरे वह पलामू क्षेत्र के प्रमुख भाजपा नेताओं में शामिल हो गए और क्षेत्रीय राजनीति में उनकी पैठ मजबूत होती चली गई।
बिहार विधानसभा से लेकर लोकसभा तक का सफर
ब्रजमोहन राम के राजनीतिक सफर में बिहार विधानसभा और लोकसभा दोनों की ही बेहद महत्वपूर्ण भूमिका रही है:
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वह अविभाजित बिहार की विधानसभा के सदस्य भी रहे थे।
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इसके बाद उन्होंने लोकसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया।
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वर्ष 1996 में वह पलामू लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए।
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इसके बाद 1998 और 1999 के आम चुनावों में भी उन्होंने शानदार जीत दर्ज की।
इस तरह उन्होंने कुल तीन बार पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। बता दें कि यह उस समय की बात है जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था। बाद में 15 नवंबर 2000 को झारखंड का अलग राज्य के रूप में गठन हुआ और पलामू झारखंड का हिस्सा बना। संसदीय राजनीति में सक्रिय रहते हुए उन्होंने लगातार क्षेत्रीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
सामाजिक गतिविधियों और जनसेवा में गहरी रुचि
ब्रजमोहन राम के सार्वजनिक जीवन का एक अहम पक्ष विभिन्न सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़ा रहा है। उनके राजनीतिक सफर के दौरान शिक्षा और सामाजिक संस्थाओं को बढ़ावा देने से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख मिलता है। चंदवा में पुस्तकालय, बालिका हाई स्कूल और डिग्री कॉलेज जैसी सुविधाओं को स्थापित करने या उनसे जुड़े प्रयासों में उनकी सक्रिय भूमिका का जिक्र क्षेत्र में हमेशा से होता रहा है।
उनकी ओडिशा के राज्यपाल पद पर नियुक्ति के बाद क्षेत्र के लोगों में यह उम्मीद जग गई है कि पलामू और चंदवा की पहचान राष्ट्रीय पटल पर और अधिक मजबूत होगी।

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