लेह, लद्दाख: सरकार ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो एक जाने-माने चेहरे हैं, को शुक्रवार को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 1980 के तहत लेह हिंसा में उनकी संलिप्तता के आरोप में हिरासत में लिया गया। हिंसा 24 सितंबर को भड़की थी, जब लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई थी।
लेह हिंसा में क्या हुआ?
* विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और इसके परिणामस्वरूप 4 युवक मारे गए और 80 घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
* 60 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया, और लेह में लगातार तीसरे दिन कर्फ्यू बढ़ा दिया गया है।
* स्कूल और कॉलेज अगली सूचना तक बंद हैं।
सोनम वांगचुक के खिलाफ सरकारी कार्रवाई
* गृह मंत्रालय (MHA) ने वांगचुक को हिंसा भड़काने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया।
* MHA ने विदेशी धन के दुरुपयोग के आधार पर उनके NGO, स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) लाइसेंस रद्द कर दिया।
* उनके एक अन्य NGO, हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) की भी संदिग्ध FCRA दुरुपयोग के लिए CBI जांच की जा रही है।
FCRA क्या है?
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) भारतीय NGO द्वारा प्राप्त विदेशी अंशदान की निगरानी करता है। विदेश से धन प्राप्त करने वाले किसी भी समूह को FCRA के तहत पंजीकृत होना आवश्यक है। ऐसे लाइसेंस के बिना विदेशी धन प्राप्त करना या उसका उपयोग करना अवैध है।
सीबीआई छापे और जाँच
* SECMOL और HIAL के खातों की जाँच के लिए लद्दाख में सीबीआई की टीमें तैनात की गई हैं।
* हालाँकि अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, फिर भी अधिकारी 2020 से 2024 के रिकॉर्ड की जाँच कर रहे हैं, जो जाँच के मूल दायरे से बाहर है।
* अधिकारी विरासत के मामलों को भी फिर से खोल रहे हैं, जिनमें से एक मज़दूरों के बकाया वेतन से संबंधित है।
सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया
वांगचुक ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा है:
* उनके संस्थान विदेशी चंदे पर निर्भर नहीं हैं और ज़्यादातर गरीब बच्चों को मुफ़्त शिक्षा प्रदान करते हैं।
* HIAL छात्रों को परियोजनाओं पर काम करने के लिए वजीफा भी देता है।
* सरकार ने पहले ज़मीन का मुफ़्त पट्टा देने का वादा किया था, लेकिन बाद में भुगतान न करने के कारण इसे रद्द कर दिया गया।
* लद्दाख को कर से छूट मिलने के बावजूद वह स्वेच्छा से कर चुकाते हैं, फिर भी उनके ख़िलाफ़ नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
हिंसा कैसे भड़की?
1. सोशल मीडिया पर लामबंदी: 23 सितंबर को, लद्दाख बंद की ऑनलाइन माँग की गई, जिससे लोगों को लेह हिल काउंसिल के आसपास इकट्ठा होने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
2. पुलिस झड़पें: जब प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की, तो पुलिस ने आँसू गैस छोड़ी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों, भाजपा कार्यालय, हिल काउंसिल की इमारतों और कुछ कारों को जलाकर जवाब दिया।
यह क्यों मायने रखता है
* 24 सितंबर की झड़पों को लद्दाख में 1989 के बाद से सबसे भीषण हिंसा करार दिया गया है।
* इस घटना ने लद्दाख के आदिवासियों को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची के तहत संरक्षण की माँग को फिर से हवा दे दी है।
* वांगचुक की गिरफ़्तारी ने केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक तनाव भी बढ़ा दिया है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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