राज्यसभा में गूंजी रांची के CIP को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाने की मांग, सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने केंद्र से की बड़ी अपील
रांची के केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की मांग राज्यसभा में उठी। सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने संसद से अलग कानून बनाकर CIP को स्वायत्तता देने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की अपील की।
Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान (Institute of National Importance) घोषित करने की मांग एक बार फिर संसद में जोरदार तरीके से उठी है। राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने शुक्रवार को शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार से संसद के पृथक अधिनियम के माध्यम से CIP को वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए अब समय आ गया है कि देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल CIP को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और अधिकार दिए जाएं।
108 साल पुराना संस्थान, हर साल 1.17 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज
सांसद डॉ. वर्मा ने सदन को बताया कि वर्ष 1918 में स्थापित CIP देश के सबसे पुराने मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल है। यह संस्थान केवल मानसिक रोगों के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि मनोचिकित्सा, क्लिनिकल साइकोलॉजी, मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य, नर्सिंग, पुनर्वास, न्यूरोसाइंस और जन-मानसिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि संस्थान में हर वर्ष 1.17 लाख से अधिक मरीजों का इलाज किया जाता है, जिनमें करीब 80 प्रतिशत मरीज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं।
आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों का दिया हवाला
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान सांसद ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की “Accidental Deaths & Suicides in India–2024” रिपोर्ट का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में देशभर में 1,70,746 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। इनमें दिहाड़ी मजदूर, गृहिणियां, विद्यार्थी, बेरोजगार, निजी कर्मचारी, किसान, स्वरोजगार से जुड़े लोग और अन्य पेशागत वर्ग शामिल हैं।
डॉ. वर्मा ने कहा कि यह स्थिति बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल चिकित्सा का विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुका है। ऐसे में मजबूत मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
संसदीय समिति भी कर चुकी है सिफारिश
सांसद ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति अपनी 148वीं रिपोर्ट “Mental Health Care and Its Management in Contemporary Times” में पहले ही CIP को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित करने की अनुशंसा कर चुकी है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 8 दिसंबर 2023 को भी राज्यसभा में विशेष उल्लेख के माध्यम से यह मांग उठाई गई थी।
बजट 2026-27 की घोषणा का किया स्वागत
डॉ. प्रदीप वर्मा ने केंद्रीय बजट 2026-27 में रांची और तेजपुर स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में विकसित करने की घोषणा का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय CIP को पूर्ण स्वायत्तता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
339 एकड़ जमीन के अंतर की स्वतंत्र जांच की मांग
सांसद ने संस्थान की भूमि का मुद्दा भी संसद में उठाया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान रिकॉर्ड के अनुसार—
CIP के पास लगभग 229.29 एकड़ भूमि है।
रांची तंत्रिका मनोचिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के पास 322.94 एकड़ भूमि उपलब्ध है।
दोनों संस्थानों के पास कुल 552.23 एकड़ भूमि दर्ज है।
जबकि पुराने गजट और भूमि अभिलेखों में कुल 891.532 एकड़ भूमि का उल्लेख मिलता है। इस प्रकार करीब 339.302 एकड़ भूमि का अंतर सामने आता है।
उन्होंने इस भूमि की वर्तमान राजस्व स्थिति, स्वामित्व, हस्तांतरण और वास्तविक कब्जे की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की।
निमहांस और एम्स की तर्ज पर मिले दर्जा
डॉ. वर्मा ने कहा कि संसद पहले भी अलग कानून बनाकर कई चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दे चुकी है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बेंगलुरु स्थित NIMHANS और एम्स नई दिल्ली को संसद के अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था। इसी तरह CIP रांची के लिए भी अलग कानून लाकर इसे राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाया जाना चाहिए।
केंद्र सरकार से समयबद्ध कार्रवाई की मांग
अपने संबोधन के अंत में सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि संसद के पृथक अधिनियम के माध्यम से केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP), रांची को राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया जाए और इसे मानसिक स्वास्थ्य, तंत्रिका विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा रोगी देखभाल के क्षेत्र में आवश्यक वैधानिक, शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई की जाए।
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
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