Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह के बयान पर पलटवार करते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय कांग्रेस के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पात्र मतदाताओं के नाम और मतदान के अधिकार की सुरक्षा लोकतंत्र से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि भाजपा कांग्रेस से बूथ लेवल एजेंट (BLA) की संख्या और फॉर्म-6 के आवेदनों का हिसाब मांग रही है, लेकिन मतदाता सूची की पारदर्शिता और शिकायतों के निपटारे पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया सरकारी अधिकारियों के माध्यम से संचालित होने का अर्थ यह नहीं है कि उसमें संभावित त्रुटियों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते।
शिकायतों के समाधान और पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदाता सूची से किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूटने, आवेदन के निपटारे में परेशानी या नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को लेकर भ्रम जैसी समस्याओं का समाधान जरूरी है। उन्होंने मांग की कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो और आवेदन की स्थिति तथा मतदाता सूची में सुधार से जुड़े तथ्यों को पारदर्शी तरीके से सामने रखा जाए।
सिन्हा ने कहा कि फॉर्म-6 और फॉर्म-8 की सुविधाओं का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि पात्र मतदाताओं को सही जानकारी मिले और किसी नागरिक को अनुचित तरीके से मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होना पड़े।
पुराने आरोपों से मौजूदा सवालों का जवाब नहीं: कांग्रेस
राकेश सिन्हा ने भाजपा की ओर से सोनिया गांधी और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर लगाए जाने वाले पुराने आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों को उठाने से वर्तमान SIR से जुड़े सवालों का समाधान नहीं होता। उन्होंने भाजपा से आरोपों के समर्थन में प्रमाण सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष रखने को कहा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा लोकतांत्रिक जवाबदेही का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी।
गौरतलब है कि SIR को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। दोनों दलों के बयानों के बीच मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और शिकायतों के निपटारे से जुड़े सवाल राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।

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