रांची: Jharkhand के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में लागू नए नियम इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, ये प्रावधान हाल ही में लागू नहीं हुए हैं, लेकिन लंबे समय तक बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों को इनके बारे में पूरी जानकारी नहीं थी। पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर 75 प्रतिशत अटेंडेंस, परीक्षा में नकल पर सख्त कार्रवाई और नए विश्वविद्यालय नियमों से जुड़ी खबरें तेजी से वायरल होने के बाद यह मुद्दा फिर सुर्खियों में आ गया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र इन नियमों के बारे में जानकारी जुटाने लगे। दरअसल, राज्य सरकार ने ‘झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026′ और परीक्षा कदाचार संबंधी नए परिनियम के जरिए उच्च शिक्षा व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए हैं, जिनमें 75% उपस्थिति अनिवार्य करने से लेकर परीक्षा में नकल करने वालों के खिलाफ एफआईआर, प्रवेश रद्द करने और डिग्री रोकने तक के प्रावधान शामिल हैं।
कैसे लागू हुआ नया कानून?
यह कानून एक दिन में लागू नहीं हुआ। सबसे पहले उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों के लिए नया मसौदा तैयार किया, जिसे मार्च 2026 में राज्य कैबिनेट की मंजूरी मिली। इसके बाद बजट सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा में इस पर लंबी बहस हुई। खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति में राज्य सरकार और राजभवन की भूमिका को लेकर विपक्ष ने कई सवाल उठाए। चर्चा के बाद विधेयक सदन से पारित हुआ।
इसके बाद 17 अप्रैल 2026 को राज्यपाल ने इस पर हस्ताक्षर किए और 28 अप्रैल 2026 को इसे झारखंड गजट में प्रकाशित कर ‘झारखंड अधिनियम संख्या-05, 2026′ के रूप में पूरे राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में लागू कर दिया गया।
अब 75 प्रतिशत उपस्थिति होगी अनिवार्य
नए कानून का सबसे बड़ा असर छात्रों की उपस्थिति पर पड़ेगा। अब किसी भी छात्र को परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 75 प्रतिशत अटेंडेंस अनिवार्य होगी। यदि किसी छात्र की उपस्थिति निर्धारित सीमा से कम रहती है तो वह परीक्षा फॉर्म भी नहीं भर सकेगा।
यह नियम केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं है। जिन विषयों में प्रैक्टिकल या लैब क्लास होती हैं, वहां भी 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। यानी केवल परीक्षा के समय कॉलेज पहुंचने की आदत अब नहीं चलेगी।
सभी विश्वविद्यालयों का सत्र अब एक साथ चलेगा
Jharkhand में अब अलग-अलग विश्वविद्यालयों के अलग-अलग शैक्षणिक कैलेंडर की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी है। नए अधिनियम के तहत सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में एक समान Academic Calendar लागू किया जाएगा।
इसका मतलब है कि नामांकन, कक्षाएं, परीक्षाएं और परिणाम लगभग एक ही समय पर होंगे। यदि किसी विश्वविद्यालय की ओर से अनावश्यक देरी की जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
चांसलर पोर्टल से होगा नामांकन
छात्रों को बार-बार अलग-अलग कॉलेजों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। अब नामांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए चांसलर पोर्टल के माध्यम से केंद्रीकृत मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी। इसी आधार पर राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिला मिलेगा।
शिक्षकों को भी देनी होगी ट्रेनिंग
नए नियम सिर्फ छात्रों के लिए नहीं हैं। सरकार ने शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया है। अब नए नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों को 12 महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। यह प्रशिक्षण झारखंड स्टेट फैकल्टी डेवलपमेंट एकेडमी में कराया जाएगा।
परीक्षा में नकल पर अब जीरो टॉलरेंस
सरकार ने परीक्षा में कदाचार रोकने के लिए पहली बार विस्तृत नियमावली तैयार की है। इसमें कदाचार को मामूली, गंभीर और अति गंभीर तीन श्रेणियों में बांटा गया है ताकि हर मामले में तय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सके।
यदि कोई छात्र उत्तर पुस्तिका पर गलत तरीके से नाम लिखता है, बिना अनुमति रंगीन पेन का इस्तेमाल करता है या विश्वविद्यालय की स्टेशनरी को नुकसान पहुंचाता है, तो इसे मामूली कदाचार माना जाएगा। ऐसे मामलों में चेतावनी देने के साथ 10 अंक तक काटे जा सकते हैं।
मोबाइल, ब्लूटूथ और स्मार्टवॉच पर पूरी तरह रोक
यदि परीक्षा के दौरान कोई छात्र मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्टवॉच, इयरपीस या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करता है, हाथ से लिखी पर्चियां या प्रिंटेड नोट्स लेकर आता है, दूसरे छात्रों से बातचीत करता है या उत्तर पुस्तिका बाहर ले जाने की कोशिश करता है, तो इसे गंभीर कदाचार माना जाएगा।
ऐसे मामलों में संबंधित विषय में शून्य अंक दिए जा सकते हैं, सीट बदली जा सकती है, आपत्तिजनक सामग्री जब्त की जाएगी और औपचारिक कार्रवाई भी होगी।
दोबारा गलती की तो दर्ज होगी FIR
यदि कोई छात्र दोबारा नकल करते हुए पकड़ा जाता है तो मामला और गंभीर हो जाएगा। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय छात्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकेगा। साथ ही उसका प्रवेश रद्द किया जा सकता है, अब तक अर्जित सभी क्रेडिट अमान्य घोषित किए जा सकते हैं और पुलिस जांच पूरी होने तक उसकी डिग्री भी रोकी जा सकती है।
यदि कोई छात्र सबूत मिटाने के उद्देश्य से परीक्षा बीच में छोड़कर भागने की कोशिश करता है, तो उस पर आर्थिक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है।
सामूहिक नकल पर पूरी परीक्षा होगी रद्द
यदि किसी परीक्षा केंद्र पर पूरी कक्षा सामूहिक रूप से नकल करती हुई पाई जाती है तो केवल कुछ छात्रों पर नहीं, बल्कि पूरी कक्षा पर कार्रवाई हो सकती है।
ऐसी स्थिति में परीक्षा का समय घटाया जा सकता है, छात्रों से लिखित शपथ पत्र लिया जाएगा और सामूहिक नकल सिद्ध होने पर पूरी परीक्षा रद्द कर दी जाएगी। यदि पूरी कक्षा वीक्षक को धमकाती है या परीक्षा बाधित करती है तो पूरे सत्र को भी निरस्त किया जा सकता है।
कुलपतियों की नियुक्ति में भी बदलाव
नए विश्वविद्यालय अधिनियम में कुलपतियों की नियुक्ति प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब सर्च कमेटी में राज्य सरकार की भूमिका पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी। यही मुद्दा विधानसभा में सबसे अधिक चर्चा का विषय भी रहा था।
क्यों जरूरी था नया कानून?
राज्य सरकार का मानना है कि लंबे समय से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र समय पर नहीं चल रहे थे। परीक्षाओं और परिणामों में देरी के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा था। वहीं नकल और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही थीं।
इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए पूरे राज्य में एक समान नियम लागू किए गए हैं, ताकि हर विश्वविद्यालय में शिक्षा की गुणवत्ता, अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बढ़ी चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि इन नियमों के लागू होने के बावजूद लंबे समय तक अधिकांश छात्रों और अभिभावकों के बीच इसकी विस्तृत जानकारी नहीं पहुंच पाई थी। हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 75% अटेंडेंस और परीक्षा में नकल पर सख्त कार्रवाई से जुड़ी पोस्ट और खबरें वायरल होने के बाद यह विषय फिर चर्चा का केंद्र बन गया। इसके बाद छात्रों ने विश्वविद्यालयों के नियमों और नए अधिनियम के प्रावधानों को लेकर जानकारी जुटानी शुरू की। हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह कोई अचानक लागू किया गया नया नियम नहीं है, बल्कि पहले से अधिसूचित प्रावधानों के तहत व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जा रहा है।
मुख्य बातें
- 75% उपस्थिति के बिना परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी।
- सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में एक समान Academic Calendar लागू होगा।
- चांसलर पोर्टल के जरिए केंद्रीकृत और पारदर्शी नामांकन होगा।
- नए शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए 12 महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग।
- परीक्षा कदाचार को तीन श्रेणियों में बांटकर अलग-अलग दंड तय किए गए हैं।
- मोबाइल, ब्लूटूथ, स्मार्टवॉच और पर्चियों से नकल करने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- दोबारा नकल करने पर एफआईआर, प्रवेश रद्द, क्रेडिट अमान्य और डिग्री रोकी जा सकती है।
- सामूहिक नकल सिद्ध होने पर पूरी परीक्षा या पूरा सत्र भी रद्द किया जा सकता है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis











