रांची: Jharkhand High Court ने Sahibganj की करीब 70 करोड़ रुपये की पाइपलाइन पेयजल आपूर्ति योजना को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक धन से तैयार की गई इस महत्वपूर्ण परियोजना की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए। इसी कारण कोर्ट ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अपर मुख्य सचिव को स्वयं साहिबगंज जाकर योजना का निरीक्षण करने और विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अपर मुख्य सचिव खुद करेंगे निरीक्षण
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण की जिम्मेदारी किसी अन्य अधिकारी को नहीं सौंपी जा सकती। अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से साहिबगंज पहुंचकर पूरी योजना का जायजा लेना होगा और 24 जुलाई तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करनी होगी।
अदालत ने कहा कि सरकार और याचिकाकर्ता दोनों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ स्तर के अधिकारी द्वारा मौके पर निरीक्षण आवश्यक है।
संयुक्त निरीक्षण में कई अधिकारी रहेंगे मौजूद
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि निरीक्षण के दौरान पेयजल विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ, साहिबगंज नगर परिषद की अध्यक्ष तथा जरूरत पड़ने पर अन्य संबंधित अधिकारियों को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही जनहित याचिका दायर करने वाले सिद्धेश्वर मंडल के अधिकृत प्रतिनिधि को भी निरीक्षण के समय मौजूद रहने की अनुमति दी गई है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
‘जनता का पैसा बर्बाद नहीं होने देंगे’
सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस योजना पर करीब 70 करोड़ रुपये या उससे अधिक की सार्वजनिक धनराशि खर्च की जा चुकी है। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी खामियों या अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण जनता के पैसे को व्यर्थ नहीं जाने दिया जा सकता।
खंडपीठ ने कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य Sahibganj के लोगों को घर-घर स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। यदि योजना अभी भी अपने लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रही है तो इसकी वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए।
सरकार का दावा- योजना पूरी तरह तैयार
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 10 मार्च 2026 को दिए गए हाईकोर्ट के आदेश के बाद योजना का शेष कार्य पूरा कर लिया गया है। सरकार ने यह भी दावा किया कि पाइपलाइन में जहां-जहां लीकेज की शिकायत थी, उसे अदालत द्वारा दिए गए अतिरिक्त 45 दिनों के भीतर ठीक कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार, अब योजना पूरी तरह तैयार है और सभी तकनीकी कमियों को दूर कर लिया गया है।
याचिकाकर्ता ने सरकार के दावों पर उठाए सवाल
सरकार के दावों का जनहित याचिका दायर करने वाले सिद्धेश्वर मंडल ने विरोध किया। उन्होंने अदालत में दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा कि जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल अलग है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, योजना अभी भी अधूरी है और कई इलाकों में पाइपलाइन से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। इसके अलावा शहर के कई घरों तक अब तक नल कनेक्शन भी नहीं पहुंच पाया है।
सुनवाई के दौरान साहिबगंज नगर परिषद के 28 में से 21 वार्ड पार्षदों के बयान भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए गए। पार्षदों ने भी दावा किया कि कई वार्डों में पाइपलाइन लीकेज की समस्या बनी हुई है और लोगों को नियमित पेयजल आपूर्ति नहीं मिल रही है।
30 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव की निरीक्षण रिपोर्ट का इंतजार करने का फैसला किया है। अदालत ने 24 जुलाई तक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को होगी।
अब सभी की नजरें निरीक्षण रिपोर्ट पर टिकी हैं। इससे साफ होगा कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी पेयजल योजना की वास्तविक स्थिति क्या है और साहिबगंज के लोगों को इसका पूरा लाभ कब तक मिल पाएगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
5+ वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ उन्होंने Gandiva, Lagatar.in, News11 Digital और Prabhat Khabar Digital जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया है। वर्तमान में Khabar Mantra Digital में Digital Media Manager-cum-Executive एवं विशेष संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।
वे विशेष रूप से कोयलांचल, BCCL, कोलियरियों, औद्योगिक क्षेत्रों, स्थानीय प्रशासन और जनहित के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं।
Expertise: Journalism • Digital Media • Ground Reporting • Content & Social Media • Video Production • News Analysis











