Jharkhand: बोकारोवासियों का वर्षों पुराना सपना, अपने शहर से हवाई उड़ान की सुविधा, अब साकार होने की कगार पर है। एयरपोर्ट संचालन से जुड़ी तमाम बाधाओं को दूर करने के बाद 20 अगस्त 2025 को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की क्षेत्रीय निदेशक निवेदिता दुबे की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है। इसे निर्णायक बैठक माना जा रहा है क्योंकि इसमें बोकारो एयरपोर्ट संचालन पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
बैठक में एएआई, बोकारो स्टील लिमिटेड (सेल) और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
बोकारो एयरपोर्ट संचालन में अब तक क्या थीं बाधाएं?
एयरपोर्ट शुरू करने में लंबे समय से कई तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही थीं। इनमें शामिल हैं:
- रनवे सुरक्षा के लिए फ्लैश लाइट की कमी
- एंबुलेंस की अनुपलब्धता
- एयरपोर्ट परिसर की सफाई और रखरखाव
- तकनीकी अनुमतियाँ व सुरक्षा मानक
हाल ही में बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने इन समस्याओं के समाधान के लिए बड़ी पहल की। उन्होंने सतनपुर पहाड़ी पर फ्लैश लाइट लगाने हेतु विधायक निधि से राशि स्वीकृत की और डीएमएफटी फंड से दो एंबुलेंस की व्यवस्था भी कर दी है। जिला प्रशासन ने भी एयरपोर्ट परिसर की सफाई का कार्य शुरू कर दिया है।
क्यों जरूरी है बोकारो एयरपोर्ट?
बोकारो न सिर्फ झारखंड का औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र है, बल्कि उत्तर छोटानागपुर प्रमंडल का प्रमुख शहर भी है। यहां एयरपोर्ट चालू होने से:
- उद्योग और व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी
- छात्रों व मरीजों को हवाई यात्रा से सुविधा मिलेगी
- बोकारो समेत गिरिडीह, धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़ और कोडरमा जिलों के लाखों लोगों को सीधा लाभ होगा
- यात्रियों को अब रांची या कोलकाता एयरपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा
अभी बाकी हैं ये औपचारिकताएँ
हालांकि अधिकतर समस्याएं दूर हो चुकी हैं, लेकिन एयरपोर्ट संचालन से पहले कुछ जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जैसे –
- ओएलएस (Obstacle Limitation Surfaces) सर्वेक्षण का नवीनीकरण
- सुरक्षा टावर की स्थापना
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति
- हवाई क्षेत्र में पेड़ों की कटाई
20 अगस्त की बैठक से उम्मीदें
स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक सभी इस बार एयरपोर्ट संचालन को लेकर पूरी तरह सक्रिय हैं। विधायक श्वेता सिंह लगातार प्रयास कर रही हैं और पूर्व विधायक भी इस मुहिम में जुड़े रहे हैं। अब लोगों की निगाहें 20 अगस्त की बैठक पर टिकी हैं। यदि बैठक में सकारात्मक निर्णय निकलता है तो बहुत जल्द बोकारो एयरपोर्ट से पहली उड़ान भरते देखने का सपना सच हो सकता है।













