Dhanbad: कोयला नगरी धनबाद के बहुचर्चित नीरज सिंह हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। करीब आठ साल लंबी कानूनी जंग के बाद अदालत ने झरिया के पूर्व भाजपा विधायक समेत दस आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। इस फैसले के साथ न्यायालय ने साफ संदेश दिया है कि कानून के सामने न अपराध और न ही सत्ता का गठजोड़ टिक सकता है।
आठ साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत
यह मामला 2017 से धनबाद की राजनीति और अपराध जगत का सबसे चर्चित मुद्दा बना रहा। अदालत में गवाहों के बयान, सबूतों की पेशी और तीखी जिरह ने पूरे आठ साल तक न्याय की तराजू को संतुलित रखा। आखिरकार, सच के पलड़े में भारी पड़ते हुए अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
जिन आरोपियों को मिली राहत
अदालत ने जिन दस लोगों को बरी किया उनमें शामिल हैं –
- संजय सिंह
- डब्लू मिश्रा
- धनजी सिंह
- पिंटू सिंह
- संजीव सिंह
- सोनू उर्फ कुर्बान
- सागर उर्फ शिबु
- चंदन उर्फ सतीश
- विनोद कुमार सिंह
- पंकज सिंह
21 मार्च 2017: जब कांप उठी थी कोयलांचल की फिज़ा
धनबाद की यादों में दर्ज वह काला दिन – 21 मार्च 2017 की शाम। समय था करीब सात बजे। सरायढेला स्थित रघुकुल आवास लौट रहे धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह अपनी फॉर्च्यूनर (JH-10 AR-4500) गाड़ी में बैठे थे। आगे की सीट पर नीरज सिंह और ड्राइवर घोल्टू महतो थे, जबकि पीछे अशोक यादव और निजी अंगरक्षक मुन्ना तिवारी मौजूद थे।
जैसे ही गाड़ी स्टील गेट के पास बने स्पीड ब्रेकर पर धीमी हुई, मौत बनकर आए दो बाइक सवार चार हमलावरों ने कार को चारों ओर से घेर लिया। अचानक 9 एमएम पिस्तौल और कार्बाइन से 50 से अधिक गोलियों की बौछार हुई।
गोलियों की गड़गड़ाहट से दहल उठा शहर
गोलियों की तड़तड़ाहट ने पूरे इलाके को दहशत में भर दिया। लोग घरों और दुकानों से बाहर निकलकर इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही मिनटों में नीरज सिंह, उनके अंगरक्षक मुन्ना तिवारी, सहयोगी अशोक यादव और ड्राइवर घोल्टू महतो की जान चली गई।
हालांकि, कानून-व्यवस्था को संभालने के मद्देनजर नीरज सिंह की आधिकारिक मौत की घोषणा केंद्रीय अस्पताल में दो घंटे बाद की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सनसनी फैला दी – नीरज सिंह के शरीर में 30 गोलियां धंसी हुई थीं।
हमलावर वारदात को अंजाम देकर गोविंदपुर की ओर फरार हो गए थे।
अदालत का ऐतिहासिक फैसला
आज, आठ साल बाद अदालत का यह फैसला न सिर्फ आरोपियों के लिए राहत लेकर आया, बल्कि न्यायपालिका की मजबूती का प्रतीक भी बना। अदालत ने यह सिद्ध कर दिया कि समय चाहे कितना भी लगे, कानून के हाथ लंबे होते हैं और न्याय हर हाल में पहुंचेगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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