National News- भारत में 2027 की जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. गृह मंत्रालय के अनुसार, अगली जनगणना 1 मार्च 2027 को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी. इस बार की जनगणना ऐतिहासिक होगी क्योंकि इसमें 1931 के बाद पहली बार जाति आधारित गणना भी की जाएगी.
पहाड़ी राज्यों में पहले शुरू होगी जनगणना
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में, जहां मार्च में जनगणना करना कठिन होता है, वहां 1 अक्टूबर 2026 से जनगणना प्रारंभ कर दी जाएगी.
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दो चरणों में होगी जनगणना:
- पहला चरण –
इसमें जनसंख्या, आयु, लिंग, शिक्षा, रोजगार, और आवास जैसी मूल जानकारी एकत्र की जाएगी. - दूसरा चरण –
इसमें जाति आधारित गणना की जाएगी. यह पहली बार होगा जब डिजिटल तरीके से जातियों की संपूर्ण गिनती की जाएगी.
क्यों जरूरी है जाति गणना?
जाति गणना के जरिए सरकार को सामाजिक संरचना की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे आरक्षण नीति, कल्याणकारी योजनाओं, और नीतिगत फैसलों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकेगा.
जनगणना होगी पूरी तरह डिजिटल
इस बार की जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी और इसे तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा. इससे पहले जनगणना की प्रक्रिया में लगभग पांच वर्ष लगते थे.
जनगणना के तहत यह भी पता लगाया जाएगा कि परिवार का घर पक्का है या कच्चा, उसके पास वाहन या ज़मीन है या नहीं, और उनकी आर्थिक स्थिति कैसी है.
2021 में नहीं हो पाई थी जनगणना
2011 के बाद अगली जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसे स्थगित करना पड़ा. अब 2027 की जनगणना इस लंबे डेटा गैप को भरने और सरकारी योजनाओं की नई दिशा तय करने का काम करेगी.
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संसद का मानसून सत्र भी तय
इस बीच, संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त 2025 तक आयोजित किया जाएगा. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने इसकी जानकारी दी और कहा कि “हमारे लिए हर सत्र विशेष सत्र है, सभी जरूरी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.”
2027 की जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि डिजिटल क्रांति, सामाजिक न्याय और आर्थिक विश्लेषण की दिशा में भारत का एक बड़ा कदम होगी. जाति गणना के जरिए देश को नीतिगत निर्णयों में नया आधार मिलेगा.













