बुधवार, अक्टूबर 7, 2026
Khabar Mantra
No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
    • चतरा Chatra
    • चाईबासा Chaibasa
    • गोड्डा Godda
    • खूंटी Khunti
    • लातेहार Latehar
    • पाकुड़ Pakur
    • रामगढ़ Ramgarh
    • साहिबगंज Sahibganj
    • सरायकेला खरसावां Seraikela Kharsawan
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी
Khabar Mantra

क्या माता सीता के श्राप से सूख गई फल्गु नदी? जानें फल्गु नदी की कहानी

Raja Dashrath Pind Daan Katha: जानें गयाजी में माता सीता द्वारा राजा दशरथ के पिंडदान की पौराणिक कथा, फल्गु नदी, अक्षयवट, गाय, केतकी फूल और ब्राह्मण को मिले श्राप-वरदान की मान्यता।

अक्टूबर 6, 2026
in धर्म-अध्याय
A A
माता सीता द्वारा गयाजी में राजा दशरथ का पिंडदान और फल्गु नदी की पौराणिक कथा

गयाजी में माता सीता द्वारा राजा दशरथ के पिंडदान की पौराणिक कथा और फल्गु नदी के श्राप की मान्यता

Share on FacebookShare on Twitter
WhatsApp चैनल से जुड़ें ताजा समाचार सीधे WhatsApp पर पाएं
जॉइन करें
Google News पर खबर मन्त्र को फॉलो करेंझारखंड की हर ब्रेकिंग खबर के लिए स्टार दबाएं
फॉलो करें
यह खबर सुनेंऑडियो
समय: ~11 मिनट•हिंदी बुलेटिन

Raja Dashrath Pind Daan Katha: बिहार के गयाजी को पितरों के श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए बेहद महत्वपूर्ण तीर्थ माना जाता है। यहां फल्गु नदी, अक्षयवट और पिंडदान से जुड़ी कई प्राचीन धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक कथा माता सीता और राजा दशरथ के पिंडदान से जुड़ी है।

Table of Contents

Toggle
  • राजा दशरथ के निधन के बाद गया पहुंचे थे श्रीराम
    • बालू से बनाया पिंड और माता सीता ने किया पिंडदान
      • माता सीता ने इन पांच को बनाया था साक्षी
      • क्या श्राप के कारण सतह पर दिखाई नहीं देता फल्गु नदी का पानी?
        • गाय को क्यों मिला श्राप?
    • ब्राह्मण को मिला क्या श्राप?
    • केतकी के फूल को पूजा से क्यों जोड़ा जाता है?
      • अक्षयवट को मिला माता सीता का वरदान
      • गयाजी में पिंडदान का क्या महत्व है?
        • माता सीता के श्राप से फल्गु नदी सूखने की कहानी कितनी सच?

मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान राजा दशरथ के निधन का समाचार मिलने के बाद गया पहुंचे थे। यहां फल्गु नदी के तट पर पिंडदान की तैयारी की गई। कथा के अनुसार, श्रीराम और लक्ष्मण जब पिंडदान की सामग्री जुटाने के लिए वहां से गए, उसी दौरान माता सीता ने स्वयं राजा दशरथ का पिंडदान किया।

📌 यह भी पढ़ें:
  • बुधवार 7 अक्टूबर को बन रहे कई शुभ योग, मेष-धनु समेत 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा
  • Navratri 2026: कलश स्थापना के समय क्यों बोया जाता है जौ? जानिए इसके उगने में छिपे भविष्य के 3 बड़े संकेत
  • गया जी में एकादशी श्राद्ध का क्या है महत्व? जान लें एकादशी श्राद्ध से जुड़ी ये महत्वपूर्ण बातें

इस पौराणिक प्रसंग में फल्गु नदी, गाय, केतकी का फूल, एक ब्राह्मण और अक्षयवट को इस घटना का साक्षी बताया गया है। कथा आगे बताती है कि जब भगवान श्रीराम ने पिंडदान की बात पर प्रमाण मांगा, तब चार साक्षियों ने माता सीता का साथ नहीं दिया, जबकि अक्षयवट ने सत्य की पुष्टि की। इसके बाद माता सीता ने चारों को श्राप और अक्षयवट को वरदान दिया।

राजा दशरथ के निधन के बाद गया पहुंचे थे श्रीराम

पौराणिक मान्यता के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम को अपने पिता राजा दशरथ के निधन की जानकारी मिली। पिता के अंतिम संस्कार और पितृ-कर्म से जुड़े दायित्व को पूरा करने के लिए श्रीराम और लक्ष्मण गयाजी पहुंचे। फल्गु नदी के तट पर राजा दशरथ के पिंडदान की तैयारी शुरू हुई। इसी दौरान पिंडदान के लिए जरूरी सामग्री लाने के उद्देश्य से श्रीराम और लक्ष्मण वहां से चले गए।

खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट
Exclusive Report
खबर मन्त्र विशेष वीडियो रिपोर्ट

इधर पिंडदान का समय निकलता जा रहा था। कथा के अनुसार, इसी समय राजा दशरथ की आत्मा माता सीता के सामने प्रकट हुई और उन्होंने पिंडदान की इच्छा व्यक्त की।

बालू से बनाया पिंड और माता सीता ने किया पिंडदान

कथा के अनुसार, माता सीता ने श्रीराम की अनुपस्थिति में पिंडदान को लेकर संकोच व्यक्त किया। लेकिन राजा दशरथ की आत्मा ने उन्हें पिंडदान करने के लिए कहा। समय कम होने के कारण माता सीता ने फल्गु नदी के किनारे मौजूद बालू से पिंड तैयार किए और विधि-विधान से राजा दशरथ का पिंडदान किया। मान्यता है कि राजा दशरथ ने इस पिंडदान को स्वीकार किया और माता सीता को आशीर्वाद दिया।

यही प्रसंग आगे चलकर गया में पिंडदान और फल्गु नदी की धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाने लगा।

झारखंड मुख्य समाचार एवं विशेष रिपोर्ट
Special Report

झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण
Special Coverage
झारखंड मुख्य समाचार एवं विश्लेषण

माता सीता ने इन पांच को बनाया था साक्षी

पौराणिक कथा में कहा गया है कि माता सीता ने अपने द्वारा किए गए पिंडदान की घटना के लिए पांच साक्षियों को चुना था।

  • फल्गु नदी
  • गाय
  • केतकी का फूल
  • ब्राह्मण
  • अक्षयवट

जब श्रीराम और लक्ष्मण वापस लौटे तो माता सीता ने उन्हें बताया कि वह राजा दशरथ का पिंडदान कर चुकी हैं। श्रीराम को यह सुनकर आश्चर्य हुआ और उन्होंने घटना की पुष्टि के लिए साक्षियों से सत्य बताने को कहा।

कथा के अनुसार, अक्षयवट को छोड़कर बाकी चारों ने माता सीता के पिंडदान की पुष्टि नहीं की। इसके बाद माता सीता ने असत्य बोलने वाले साक्षियों को श्राप दिया।

क्या श्राप के कारण सतह पर दिखाई नहीं देता फल्गु नदी का पानी?

फल्गु नदी से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता यही है। कथा के अनुसार, माता सीता ने नदी को श्राप दिया कि उसका जल सतह पर दिखाई नहीं देगा और वह जमीन के नीचे प्रवाहित होगी।

इसी धार्मिक मान्यता के कारण फल्गु नदी को लेकर यह कथा आज भी गयाजी की लोक-परंपरा में सुनाई जाती है। हालांकि, नदी के मौसमी स्वरूप और उसके जल के भूमिगत प्रवाह को समझने के लिए भौगोलिक एवं जलवैज्ञानिक कारण अलग विषय हैं। इसलिए माता सीता के श्राप वाली बात को पौराणिक मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

गाय को क्यों मिला श्राप?

कथा के अनुसार, गाय ने भी माता सीता द्वारा किए गए पिंडदान की सच्चाई की पुष्टि नहीं की। इससे नाराज होकर माता सीता ने गाय को श्राप दिया।

लोकमान्यता में इस प्रसंग को गाय के मुख को अपवित्र माने जाने की कथा से जोड़ा जाता है, जबकि हिंदू परंपरा में गाय को सामान्य रूप से अत्यंत पवित्र माना गया है।

ब्राह्मण को मिला क्या श्राप?

पौराणिक कथा में ब्राह्मण को भी पिंडदान का साक्षी बताया गया है। जब उन्होंने माता सीता के पक्ष में सत्य नहीं बताया तो वह नाराज हो गईं। मान्यता के अनुसार, माता सीता ने श्राप दिया कि गया के ब्राह्मणों को कितना भी धन प्राप्त हो, उन्हें संतुष्टि नहीं होगी और धन की इच्छा बनी रहेगी।

यह प्रसंग गया के पंडा समाज और वहां की पारंपरिक पिंडदान व्यवस्था से जुड़ी लोककथाओं में विशेष रूप से सुनाया जाता है।

केतकी के फूल को पूजा से क्यों जोड़ा जाता है?

कथा में केतकी के फूल को भी साक्षी बनाया गया है। जब उसने भी माता सीता के पिंडदान की सच्चाई का समर्थन नहीं किया तो उन्हें क्रोध आया।

खबर मन्त्र एक्सक्लूसिव पड़ताल एवं विश्लेषण
Exclusive

मान्यता है कि इसके बाद माता सीता ने केतकी के फूल को श्राप दिया कि वह पूजा में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि इस कथा को केतकी फूल के धार्मिक संदर्भ से भी जोड़ा जाता है।

अक्षयवट को मिला माता सीता का वरदान

पांचों साक्षियों में केवल अक्षयवट ने माता सीता के पक्ष में सत्य बताया। इससे प्रसन्न होकर माता सीता ने उसे अक्षय रहने का वरदान दिया। ‘अक्षय’ का अर्थ ही है-जिसका क्षय न हो। इसी धार्मिक मान्यता के कारण गयाजी में स्थित अक्षयवट को पिंडदान और श्राद्ध कर्म से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।

पितृपक्ष के दौरान गया आने वाले श्रद्धालु अक्षयवट के पास पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस तरह अक्षयवट केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि गया की पितृ परंपरा और धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है।

गयाजी में पिंडदान का क्या महत्व है?

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में गया को पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। ऐसी आस्था है कि यहां पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को शांति तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।

राजा दशरथ और माता सीता से जुड़ी यह कथा गया की धार्मिक पहचान को और भी विशेष बनाती है। फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और अक्षयवट जैसे स्थान गया के पितृ-तीर्थ की परंपरा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

माता सीता के श्राप से फल्गु नदी सूखने की कहानी कितनी सच?

क्या सच में माता सीता के श्राप से फल्गु नदी सूख गई? इसका जवाब धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अलग-अलग है। पौराणिक कथा में फल्गु नदी के सतह पर सूखी दिखाई देने की वजह माता सीता का श्राप बताई जाती है। वहीं नदी के वास्तविक जल प्रवाह और स्वरूप को भौगोलिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझा जाता है।

यही वजह है कि राजा दशरथ के पिंडदान और माता सीता के श्राप की यह कथा आज भी गयाजी की धार्मिक परंपरा, लोकविश्वास और पितृपक्ष की मान्यताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

Ritika Singh
Ritika Singh

कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।

ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स
Top Updates
ताजा प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय अपडेट्स

Related Posts

7 अक्टूबर 2026 का राशिफल, ग्रह-नक्षत्र और 12 राशियों का ज्योतिषीय
धर्म-अध्याय

बुधवार 7 अक्टूबर को बन रहे कई शुभ योग, मेष-धनु समेत 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा

अक्टूबर 7, 2026
Navratri 2026: कलश स्थापना के समय क्यों बोया जाता है जौ? जानिए इसके उगने में छिपे भविष्य के 3 बड़े संकेत
धर्म-अध्याय

Navratri 2026: कलश स्थापना के समय क्यों बोया जाता है जौ? जानिए इसके उगने में छिपे भविष्य के 3 बड़े संकेत

अक्टूबर 6, 2026
गया जी में एकादशी श्राद्ध के दौरान पिंडदान और तर्पण करते श्रद्धालु
धर्म-अध्याय

गया जी में एकादशी श्राद्ध का क्या है महत्व? जान लें एकादशी श्राद्ध से जुड़ी ये महत्वपूर्ण बातें

अक्टूबर 6, 2026
Next Post
बारिश और बर्फ़बारी अपने साथ लेकर आयी ठण्ड का मौसम

बारिश और बर्फ़बारी अपने साथ लेकर आयी ठण्ड का मौसम

Deliberations on the organization and upcoming programs at the BJP Jharkhand Core Committee meeting.

BJP झारखंड कोर कमेटी की बैठक में संगठन और आगामी कार्यक्रमों पर मंथन

Breaking News: JPSC-JSSC परीक्षा रद्द मामले में हाईकोर्ट ने पूछा-3 साल में जांच पूरी क्यों नहीं हुई?

Breaking News: JPSC-JSSC परीक्षा रद्द मामले में हाईकोर्ट ने पूछा-3 साल में जांच पूरी क्यों नहीं हुई?

अक्टूबर 7, 2026

हजारीबाग में जमीन घोटाले पर ACB का शिकंजा, तीन आरोपी गिरफ्तार

झारखंड में शिक्षक बनने का सुनहरा मौका: 18 अक्टूबर तक मौका, ऐसे करें आवेदन

Breaking News: झारखंड कैबिनेट की अहम बैठक फिर टली-जाने वजह

Breaking News: JPSC-JSSC परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर हाईकोर्ट में सुनवाई-दोनों पक्षों में लंबी बहस

राहुल गांधी पर FIR दर्ज होते ही गरमाई राजनीति, आकाशवाणी परिसर में धरने को लेकर घिरे कांग्रेस नेता!

Khabar Mantra

© 2025 Khabar Mantra

Navigate Site

  • Home
  • Privacy Policy
  • Corrections Policy
  • Editorial Policy
  • Terms of Service (नियम और शर्तें)
  • Contact Us
  • Sitemap

Follow Us

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
व्हाट्सएप शेयर ग्रुप से जुड़ें
✕
अगला लेख
✕

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • होम
  • झारखंड
    • रांची Ranchi
    • धनबाद Dhanbad
    • जमशेदपुर Jamshedpur
    • पलामू Palamu
    • कोडरमा Koderma
    • गढ़वा Garhwa
    • गिरिडीह Giridih
    • गुमला Gumla
    • देवघर Deoghar
    • दुमका Dumka
    • बोकारो (Bokaro)
    • जामतारा Jamtara
    • सिमडेगा Simdega
    • हजारीबाग Hazaribagh
    • लोहरदगा Lohardaga
    • चतरा Chatra
    • चाईबासा Chaibasa
    • गोड्डा Godda
    • खूंटी Khunti
    • लातेहार Latehar
    • पाकुड़ Pakur
    • रामगढ़ Ramgarh
    • साहिबगंज Sahibganj
    • सरायकेला खरसावां Seraikela Kharsawan
  • क्राइम
  • देश
    • बिहार
  • धर्म-अध्याय
  • खेल
  • शिक्षा
  • लाइफस्टाइल
    • मनोरंजन Entertainment
  • खबर हटके
  • टेक्नोलॉजी

© 2025 Khabar Mantra

📍

अपना शहर / जिला चुनें

झारखंड व बिहार के प्रमुख जिलों की ताजा खबरें

🌟 रांची (Ranchi) राजधानी 🌟 धनबाद (Dhanbad) कोयलांचल 🌟 जमशेदपुर (Tata) इस्पात नगरी बोकारो (Bokaro) पलामू (Palamu) हजारीबाग (Hazaribagh) गिरिडीह (Giridih) देवघर (Deoghar) कोडरमा (Koderma) दुमका (Dumka) रामगढ़ (Ramgarh) गढ़वा (Garhwa) गुमला (Gumla) चाईबासा (Chaibasa) चतरा (Chatra) लोहरदगा (Lohardaga) सिमडेगा (Simdega) जामताड़ा (Jamtara) खूंटी (Khunti) लातेहार (Latehar) साहिबगंज (Sahibganj) पाकुड़ (Pakur) गोड्डा (Godda) सरायकेला (Seraikela) 🚩 बिहार (Bihar News) 🏹 पूरा झारखंड (All)
होम आप का शहर K जॉब्स Shorts