रांची के Birsa Munda Central Jail होटवार में बंद एक महिला बंदी के गर्भवती होने के मामले ने अब कानूनी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। मामले को लेकर झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) ने गंभीर रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में खबर प्रकाशित होने के बाद न्यायमूर्ति-सह-झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष Sujit Narayan Prasad ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची को मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। साथ ही पीड़ित महिला को तत्काल कानूनी सहायता उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
विशेष जांच टीम ने जेल पहुंचकर की जांच
निर्देश के बाद डालसा की ओर से एक विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, डालसा सचिव, महिला एलएडीसी चीफ समेत अन्य महिला सदस्य शामिल थीं। जांच टीम ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचकर पूरे मामले की पड़ताल की।
जांच के दौरान टीम ने महिला बंदी, जेल पीएलवी और जेल चिकित्सक का बयान दर्ज किया। इसके अलावा जेल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण भी किया गया।
शिकायत पेटी नहीं मिलने पर नाराज हुई टीम
निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि जेल के किसी भी वार्ड में शिकायत पेटी नहीं लगाई गई थी। इस पर जांच टीम ने नाराजगी जताई और जेल अधीक्षक को दो दिनों के भीतर सभी वार्डों में शिकायत पेटियां लगाने का निर्देश दिया।
टीम ने यह भी कहा कि महिला बंदियों की शिकायतों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जेल प्रशासन को अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है।
झालसा को भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट
जांच पूरी होने के बाद टीम ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट झालसा को सौंप दी है। डालसा सचिव Rakesh Roushan ने बताया कि पीड़ित महिला को विधिक सहायता योजना के तहत निःशुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया है।
साथ ही जेल प्रशासन को महिला बंदी की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है। मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।









