पटना: बिहार में मतदाता सूची को शुद्ध और त्रुटिरहित बनाने के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की रिपोर्ट में सामने आया है कि राज्य में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के हजारों नागरिक गलत तरीके से मतदाता सूची में शामिल हैं।
1 से 30 अगस्त तक विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान
आयोग ने 1 अगस्त से 30 अगस्त तक घर-घर जाकर ऐसे लोगों की जांच का निर्णय लिया है। अगर इनके दस्तावेज फर्जी पाए गए तो 30 सितंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची से इनके नाम हटा दिए जाएंगे।
फर्जी दस्तावेज भी किए गए तैयार
सूत्रों के मुताबिक, इन विदेशी नागरिकों ने आधार कार्ड, राशन कार्ड और मूल निवासी प्रमाण पत्र जैसे फर्जी दस्तावेज भी बनवा लिए हैं। BLO द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ऐसे सभी संदिग्ध लोगों की सूची तैयार की जा रही है।
अब तक 84% मतदाताओं ने जमा किए गणना फार्म
सघन सत्यापन अभियान के तहत अब तक 84 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने गणना फार्म जमा कर दिए हैं। आयोग ने 2003 के बाद मतदाता सूची में जुड़े सभी नए नामों के दस्तावेजों की जांच के आदेश दिए हैं।
क्यों जरूरी है यह जांच?
संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार केवल भारतीय नागरिक ही मतदान कर सकते हैं। आयोग को यह अधिकार है कि वह मतदाता के दावे की जांच कर सकता है और असत्य पाए जाने पर उसका नाम सूची से हटा सकता है।
क्या कहता है अनुच्छेद 326?
अनुच्छेद 326 के मुताबिक, भारत का प्रत्येक नागरिक जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका है और जिसे किसी कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया गया है, वह लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान का हकदार है।













