Jharkhand: भारत में बैन होने के बावजूद ‘जिगाना’ पिस्टल कैसे बन रही अपराधियों की पहली पसंद
देश में हाईप्रोफाइल हत्याकांड की बात हो तो असरफ से लेकर बाबा सिद्धिकी और सिद्धू मूसेवाला जैसे नाम सामने आते हैं। इन मामलों में एक समान बात यह रही कि वारदात में आधुनिक विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया। अब वही ट्रेंड झारखंड में भी दिखने लगा है, जहां अपराधी देशी कट्टे को छोड़कर तुर्की में बनी जिगाना पिस्टल का उपयोग कर रहे हैं। हाल ही में रांची के टिटोस रेस्टोरेंट में हुए गोलीकांड में भी इसी हथियार के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है, जिससे संकेत मिलते हैं कि राज्य में अपराधियों तक हाईटेक हथियार पहुंच चुके हैं।
भारत में प्रतिबंधित होने के बावजुद गैंगस्टरों तक कैसे पहुंच रही
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर भारत में प्रतिबंधित यह पिस्टल गैंगस्टरों तक कैसे पहुंच रही है और इतनी तेजी से उनकी पसंद कैसे बन गई। जिगाना पिस्टल तुर्की में निर्मित एक सेमी-ऑटोमैटिक हथियार है, जो अन्य सामान्य पिस्टलों की तुलना में तेजी से फायर करता है। यही कारण है कि देश के कई बड़े अपराधियों के बीच यह हथियार लोकप्रिय हो चुका है और अब झारखंड में भी इसका चलन बढ़ रहा है।
एक साथ 17 राउंड तक कारतूस भरे जा सकते हैं
अकसर अपराध के दौरान हमलावरों की कोशिश होती है कि वे कम समय में वारदात को अंजाम देकर मौके से निकल जाएं। ऐसे में कई बार देशी हथियार धोखा दे जाते हैं, लेकिन जिगाना पिस्टल को अधिक भरोसेमंद माना जाता है। इसमें एक साथ 17 राउंड तक कारतूस भरे जा सकते हैं और यह तेजी से लगातार फायर करने में सक्षम है। इसमें 9 एमएम की गोलियों का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे और घातक बनाता है।
Jharkhand: तुर्की की TISAS कंपनी द्वारा निर्माणित
इस पिस्टल को तुर्की की TISAS कंपनी ने वर्ष 2001 में तैयार किया था। इसकी कीमत आम तौर पर 7 से 8 लाख रुपये बताई जाती है, जबकि अवैध बाजार में यह 10 से 12 लाख रुपये तक में बेची जाती है। इसके बावजूद सबसे अहम सवाल यही है कि पूरी तरह प्रतिबंधित होने के बाद भी यह हथियार भारत में कैसे पहुंच रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, झारखंड के कुछ गैंगस्टर विदेश से अपने नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं और नेपाल या पाकिस्तान के रास्ते इन हथियारों की तस्करी कराई जा रही है। हाल ही में झारखंड एटीएस ने मयंक सिंह की गिरफ्तारी के बाद ऐसे नेटवर्क के संकेत भी दिए थे।
बताया जाता है कि इस हथियार का इस्तेमाल कई चर्चित हत्याकांडों में हो चुका है। अतीक-अशरफ हत्याकांड में भी इसी तरह की पिस्टल का उपयोग किए जाने की बात सामने आई थी, वहीं सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी इसी श्रेणी के हथियार का जिक्र किया जाता है।
Jharkhand: रांची के टिटोस होटल गोलीकांड में भी जिगाना का इस्तेमाल
रांची के टिटोस होटल गोलीकांड के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इसमें सामने आया कि प्रिंस खान गिरोह से जुड़े शूटर सचिन यादव ने जिस हथियार से फायरिंग की, वह साधारण पिस्टल नहीं बल्कि जिगाना थी। इसी हमले में होटल के एक वेटर की गोली लगने से मौत हो गई। हालांकि, घटना में इस्तेमाल पिस्टल अभी तक बरामद नहीं हो सकी है। अब देखना होगा कि पुलिस इस हथियार को कब तक जब्त कर पाती है और इसके नेटवर्क का पूरा खुलासा कब तक हो पाता है।













