झारखंड की राजनीति में एक बार फिर परीक्षा घोटाले को लेकर हलचल तेज हो गई है। लोक भवन में मंगलवार को संतोष कुमार गंगवार से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की उत्पाद सिपाही प्रतियोगी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने किया। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी नेताओं ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा के अनुसार, 12 अप्रैल 2026 को आयोजित उत्पाद सिपाही परीक्षा में बड़े पैमाने पर पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए हैं। तमाड़ के एक निर्माणाधीन भवन में परीक्षा माफियाओं द्वारा अभ्यर्थियों को प्रश्नों के उत्तर रटवाने की बात सामने आई, जहां से 150 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की गई।
छापेमारी के दौरान कंप्यूटर, प्रिंटर, लैपटॉप, संदिग्ध प्रश्नपत्र, नोट्स और कई वाहन बरामद किए गए। आरोप है कि अभ्यर्थियों से 15-15 लाख रुपये तक लेकर सौदे किए गए और उनके मोबाइल व एडमिट कार्ड तक जब्त कर लिए गए थे।
यह परीक्षा राज्य के 8 जिलों में 370 केंद्रों पर 583 पदों के लिए आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 1.48 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे।
JSSC के रुख पर उठे सवाल
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इतने बड़े खुलासे और गिरफ्तारियों के बावजूद JSSC द्वारा पेपर लीक से इनकार करना संदेह पैदा करता है।
नेताओं का कहना है कि राज्य में पहले भी झारखंड लोक सेवा आयोग और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
7 सूत्री मांगें
भाजपा ने राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन में निम्न प्रमुख मांगें रखीं—
- उत्पाद सिपाही परीक्षा पेपर लीक की CBI जांच
- पेपर माफिया, सॉल्वर गैंग और एजेंसियों की भूमिका की जांच
- अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा
- प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय और दोषियों पर सख्त कार्रवाई
- JPSC परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
- पिछले 6 वर्षों की परीक्षाओं की CBI जांच
- भविष्य में परीक्षा प्रणाली में सख्त सुधार लागू करना
राजनीतिक बयानबाजी तेज
भाजपा ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं प्रशासनिक विफलता और संभावित संरक्षण की ओर इशारा करती हैं। पार्टी का दावा है कि बिना स्वतंत्र एजेंसी की जांच के सच्चाई सामने आना मुश्किल है।
झारखंड में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अब देखना होगा कि राज्यपाल इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या CBI जांच की मांग को मंजूरी मिलती है या नहीं।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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