रांची: झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। गंभीर मामलों में इलाज और ऑपरेशन पर 10 से 15 लाख रुपये तक खर्च करने की व्यवस्था की जाएगी। शुक्रवार (30 अक्टूबर) को रांची के रिम्स ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 380 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।
स्वास्थ्य विभाग और अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के संयुक्त तत्वावधान में शुरू किए गए इस अभियान के तहत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उनका इलाज किया जाएगा। स्क्रीनिंग में जिन बच्चों में बीमारी की पुष्टि होगी, उन्हें आगे की जांच और आवश्यक उपचार के लिए चयनित किया जाएगा।
इलाज से लेकर ऑपरेशन तक का खर्च उठाएगी सरकार
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि गरीब परिवारों को बच्चों के इलाज के लिए जमीन बेचने या कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सामान्य जरूरत के अनुसार 5 से 10 लाख रुपये और गंभीर मामलों में 10 से 15 लाख रुपये तक के उपचार का खर्च सरकार उठाएगी।
इसमें बच्चों की जांच, विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह, ऑपरेशन, दवाइयां, अस्पताल में रहने और भोजन की व्यवस्था शामिल होगी। साथ ही बच्चों और अभिभावकों की यात्रा तथा ऑपरेशन के बाद फॉलोअप की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
रिम्स में विकसित होगी बच्चों की हार्ट सर्जरी की सुविधा
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रिम्स में जन्मजात हृदय रोग के इलाज और ऑपरेशन की स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरण, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम शुरू किया जाए।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि अगले एक वर्ष में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद की दिशा में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य झारखंड के बच्चों को गंभीर हृदय रोग के इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम करना है।
बच्चों में इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अभिभावकों से बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के संभावित लक्षणों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने बताया कि दूध पीते समय जल्दी थकना, सांस तेज चलना, वजन नहीं बढ़ना, होंठ या नाखून नीले पड़ना और बार-बार छाती में संक्रमण होना हृदय संबंधी बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच कराने की सलाह दी गई। चिकित्सकों के अनुसार, हर बच्चे के दिल में छेद होने पर ऑपरेशन जरूरी नहीं होता। बीमारी की गंभीरता और जांच रिपोर्ट के आधार पर उपचार तय किया जाता है।
‘इलाज के अभाव में किसी गरीब बच्चे की मौत नहीं होने दूंगा’
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उन्होंने गरीबी और आर्थिक मजबूरी के कारण बच्चों का इलाज नहीं करा पाने वाले परिवारों की परेशानी देखी है। उनका प्रयास है कि झारखंड में किसी गरीब बच्चे का इलाज पैसों के अभाव में न रुके।
उन्होंने राज्य के जनप्रतिनिधियों से भी अपील की कि यदि उनके क्षेत्र में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित कोई जरूरतमंद बच्चा है, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाएं।
कार्यक्रम में रिम्स के निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, अमृता हॉस्पिटल कोच्चि के डॉ. ब्रजेश सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक, बच्चे और उनके अभिभावक मौजूद रहे।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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