Jharkhand News: गिरिडीह अग्निकांड: 7 घर, लाखों का नुकसान और अब सिर्फ सन्नाटा
Jharkhand News: खबर मंत्र संवाददाता बिरनी गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह जिला अंतर्गत बिरनी प्रखंड में मंगलवार की रात एक दिल दहला देने वाली घटना घटी। भरकट्टा ओपी क्षेत्र के तुलाडीह गांव में रात करीब 9 बजे भीषण आग लगने से सात घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। इस अग्निकांड में लाखों की संपत्ति का नुकसान हुआ है और कई परिवार अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की शुरुआत एक घर से हुई थी, लेकिन तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया। देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के घरों को अपनी चपेट में ले लिया। ग्रामीणों के अनुसार, आग लगने का प्राथमिक कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
इन परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस भीषण अगलगी में गांव के कुछ लोगों के घर और सपने खाक हो गए। गांव के रहने वाले बासुदेव ठाकुर, शक्ति ठाकुर, मुरली ठाकुर, नागो ठाकुर, बंगाली ठाकुर, सुदामा ठाकुर, अर्जुन ठाकुर के घर पूरी तरह जल कर खाक हो गए।
बासुदेव ठाकुर के घर में किराये पर रह रहे विनय राम का भी सारा सामान जल गया है। अनाज, कपड़े, बर्तन, फर्नीचर और महत्वपूर्ण दस्तावेज जलने से इन परिवारों के पास अब कुछ भी शेष नहीं बचा है।
ग्रामीणों का संघर्ष और दमकल की देरी
आग लगते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बाल्टी, पाइप और मोटर के जरिए आग बुझाने की कोशिश की। गैस सिलेंडर और कुछ कीमती सामान बाहर निकालने के प्रयास किए गए, लेकिन आग की भयावहता के आगे सब बेबस नजर आए। ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी समय पर नहीं पहुंच सकी, जिससे नुकसान बढ़ गया।
प्रशासनिक पहल और राहत की मांग
घटना की सूचना मिलते ही भरकट्टा ओपी प्रभारी ओमप्रकाश पांडेय, जनप्रतिनिधि राजकुमार नारायण सिंह, राजेंद्र यादव और समाजसेवी जितेंद्र सेठ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री की मांग की है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल पीड़ित परिवारों को तत्काल सरकारी मुआवजा देने की मांग की है, और अस्थायी आवास और राशन की व्यवस्था की मांग रखी है। साथ ही घटना की उच्च स्तरीय जांच की भी मांग ग्रामीणों द्वारा की गई है।
तुलाडीह की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में फायर सेफ्टी और दमकल केंद्रों की दूरी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में प्रभावित परिवार दाने-दाने को मोहताज हैं और प्रशासन की ओर टकी लगाए बैठे हैं। फिलहाल गांव में मातम जैसा माहौल है और हर कोई पीड़ित परिवारों के दर्द में शामिल होकर उनकी मदद के लिए आगे आ रहा है।











